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Basti News: सहालग शुरू होते ही मिलावटखोर सक्रिय...बुकिंग की जुगत में जुटे

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बस्ती। सहालग का सीजन शुरू हो गया है। मांगलिक कार्यक्रम से लेकर अन्य आयोजन शुरू हैं, ऐसे में धंधेबाज मिलावटी पनीर खपाने के लिए एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। सहालग के सीजन में पनीर की खपत बढ़ जाती है। जबकि दूध के उत्पादन पहले जैसा है। ऐसे में मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावट का धंधा जोर पकड़ने लगा है। बुकिंग के लिए फैक्टरी संचालक और बिचौलिए कैरियर बनकर दौड़-भाग तेज कर दिए हैं।
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खरमास के चलते मंद पड़े मिलावटी धंधे को फिर से जोर देने में धंधेबाज जुट गए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को पनीर और खोआ खरीदते समय सावधानी बरतने की अपील की है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग समय-समय पर दूध और पनीर के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजता रहता है, मगर धंधेबाज सहालग में मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की सेहत का ध्यान रखना भूल जाते हैं और मिलावटी खाद्य सामग्री आयोजनों तक पहुंचाने में सफल हो जाते हैं।
बता दें कि नवंबर और दिसंबर माह में संदेह होने पर पनीर के दो नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। अभी उसकी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें मिलावट की पुष्टि तो हुई है मगर, केमिकल और कौन-कौन तत्व उसमें पाए गए हैं इसकी स्पष्ट रिपोर्ट न होने पर फिर से सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। बताया गया कि फाइनल रिपोर्ट आने पर विभाग कार्रवाई करेगा। ग्रामीण क्षेत्र के गांवों से शुद्ध खोआ लाकर शहर में धंधेबाज मिलावट कर मोटी रकम कमाते हैं।
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सहालग के दौरान दूध की मांग बढ़ने पर धंधेबाज पानी तो मिलाते ही हैं, अब पाउडर से बना दूध भी बेचने लगे हैं। पशुपालन विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में दूध उत्पादन से ज्यादा खपत है। ऐसे में शुद्धता की गारंटी संभव नहीं है। यही हाल पनीर और दूध से बने खाद्य पदार्थों की भी है। जानकार बताते हैं कि सामान्य दिनों में जिले में 35 से 40 क्विंटल पनीर की खपत होती है। सहालग और त्योहारों में दो से तीन सौ क्विंटल पहुंचने की संभावना है। लोकल दुकानदार 270-300 रुपये किलो पनीर बेच रहे हैं। इसमें मिलावट की आशंका है। जबकि शुद्ध पनीर 380-450 रुपये किलो बिक रहा है।
जिले में दूध का उत्पादन प्रतिदिन 30 हजार लीटर के करीब है जबकि इससे इतर पनीर की खपत सहालग में जिले में दोगुना से अधिक हो जाती है। लगन से पहले पांच से सात क्विंटल खोआ की खपत थी। लगन में बुकिंग के कारण 10 से 12 क्विंटल की खपत बढ़ गई है। इसे पूरा करने के लिए कानपुर मंडी, नवाबगंज, बलरामपुर समेत अन्य लोकल मंडी से खोआ और पनीर मंगाया जा रहा है।
इसके अलावा खलिलाबाद और अंबेडकरनगर व अयोध्या क्षेत्र से खाेआ और पनीर मंगाया जाता है। एक फुटकर कारोबारी ने बताया कि पाउडर और रिफाइंड ऑयल से बना खोआ 200 से 230 रुपये प्रति किलो मिल जाता है। इसे 280 से 325 रुपये प्रति किलो के भाव में बेच दिया जाता है। सहालग में नकली पनीर खपाने के लिए बिचौलिए कैरियर का काम करते हैं।
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ऐसे करें नकली पनीर की पहचान

खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने बताया कि असली और नकली पनीर की पहचान हाथों से मसलकर किया जा सकता है। यदि पनीर मसलने के बाद टूटकर गिरने लगे तो समझ लीजिए नकली है। नकली पनीर की पहचान पानी में उबालकर भी कर सकते हैं। उबालने के बाद पनीर को पानी से निकालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने के बाद पनीर पर सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालकर 10 मिनट के लिए छोड़ दे। यदि पनीर का रंग हल्का लाल हो जाता है तो खरीदा गया पनीर डिटर्जेंट या यूरिया से बनाया गया है।

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दूध, खोआ आदि खाते समय बरतें सावधानी बरतें

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि बाजार में बिकने वाली कई खाद्य सामग्रियों में मिलावट हो रही है। इसे सेवन से कई प्रकार की बीमारी का खतरा रहता है। सबसे ज्यादा पेट की समस्या होती है। मरीज अक्सर पेट की समस्या लेकर अस्पताल आ रहे हैं, इसलिए दूध, खोआ आदि खाते समय सावधानी बरतें।

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मिलावटी पनीर मामले में तीन पर दर्ज हो चुकी है प्राथमिकी
खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग के सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड-दो चितरंजन कुमार सिंह के अनुसार, नवंबर में रोडवेज स्थित एक पनीर बनाने वाली फैक्टरी पर छापेमारी की गई थी, जिसमें बड़े पैमाने पर पनीर, रसायन और सिंथेटिक दूध मिला था। सैंपल भरकर पनीर नष्ट कराते हुए संचालक और एक और आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वहीं, दिसंबर माह में खलिलाबाद से हर्रेया क्षेत्र में ले जाते समय गनेशपुर में पुलिस जांच में नकली पनीर पकड़े थे। वाहन चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, साथ ही पनीर का सैंपल भरकर उसे नष्ट कराया गया था। इसके अलावा रंगीन भुना चना भी हर्रैया में पकड़े थे। उसे नष्ट कराया गया था। सैंपल जांच के लिए भेजा गया है, अभी रिपोर्ट नहीं आई है।
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नवंबर और दिसंबर में दो जगह से पनीर और अन्य खाद्य सामग्री पकड़कर उसे जब्त करते हुए नष्ट कराया गया था। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आ गई है, उसमें मिलावट की पुष्टि हुई है। अन्य रसायनिक की पुष्टि न होने पर फिर से सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। फाइनल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। सहालग सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थ निर्माण इकाई और विक्रेता पर टीम की नजर है।
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चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी, बस्ती।
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