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चार महीने नहीं होंगे मांगलिक अनुष्ठान

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चार महीने नहीं होंगे मांगलिक अनुष्ठान
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दो दिन बाद 20 जुलाई को पड़ रही हरिशयनी एकादशी
14 नवंबर देवोत्थान एकादशी से फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दो दिन बाद यानी 20 जुलाई मंगलवार को हरिशयनी या फिर कहें देवशयनी एकादशी पड़ रही है। जिसके बाद चार मास के लिए सभी मांगलिक कार्यों जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत आदि पर विराम लग जाएगा।
ज्योतिषाचार्य सतीश मणि त्रिपाठी बताते हैं कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के एकादशी दिनांक 14 नवंबर को देव उत्थान एकादशी से पुन: शुभ लग्न के दिन शुरू हो जाएंगे। सनातन परंपराओं में मान्यता है कि इस चार माह तक भगवान विष्णु शयन हेतु क्षीर सागर को चले जाते हैं और ब्रह्मांड का नियंत्रण भगवान भोले नाथ के हाथ में आ जाता है। इसलिए श्रावण से लेकर कार्तिक मास तक भगवान शिव के पूजा-पाठ करने का अत्यंत महत्व है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 19 जुलाई को रात 09 बजकर 59 मिनट से हो रहा है, जो अगले दिन 20 जुलाई को शाम 07 बजकर 17 मिनट तक है। ऐसे में उदया तिथि 20 जुलाई को प्राप्त हो रही है, तो देवशयनी एकादशी व्रत 20 जुलाई को ही रखा जाएगा।
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चिकित्सा विज्ञान की मान्यता
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इस दौरान सूर्य व चंद्र का तेज पृथ्वी पर कम पहुंचता है, जल की मात्रा अधिक हो जाती है, वातावरण में अनेक जीव-जंतु उत्पन्न हो जाते हैं, जो अनेक रोगों का कारण बनते हैं। इसलिए साधु-संत, तपस्वी इस काल में एक ही स्थान पर रहकर तप, साधना, स्वाध्याय व प्रवचन आदि करते हैं। इन दिनों केवल ब्रज की यात्रा की जा सकती है, क्योंकि इन महीनों में भूमंडल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर वास करते हैं।
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क्या है इसका महत्व
हिंदू धर्म की समस्त मान्यतायें व रीति रिवाज प्रकृति आधारित होती है। हिंदू धर्म के पंचांग, जिससे हिंदू आस्था रखने वाले अपने दिनचर्या तय करते हैं, वह पूर्णतया खगोलशास्त्र पर आधारित है। मकान बनाने से लेकर शादी विवाह आदि हर शुभ कार्य के लिये पंचांग के हिसाब से तिथि तय है। ये तिथियां प्रकृति की दृष्टि से निर्धारित की गई है। सनातन धर्म के पंचांग ब्रह्मांड में पृथ्वी के सबसे करीब स्थित नौ ग्रहों के आधार पर है। आज आधुनिक शिक्षा भी यह मानने लगी है कि पृथ्वी पर ग्रहों का प्रभाव है। इसी आधार पर पंचांग में शुभ व अशुभ तिथि तय की गई है । अलग-अलग देवी देवताओं के उपासना के लिये इन ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग समय निर्धारित है।
तिथि मुहूर्त
एकादशी तिथि आरंभ: 19 जुलाई , 2021 को रात्रि 09 बजकर 59 मिनट
एकादशी तिथि समाप्त: 20 जुलाई, 2021 को रात्रि 07 बजकर 17 मिनट
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