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पुलिस को बेझिझक बताएं परेशानी, मदद जरूर मिलेगी

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पटेल एसएमएच हास्पिटल एंड आयुष पैरामेडिकल कालेज गोटवा में अपराजिता कार्यक्रम को संबोधित करते सी? - फोटो : BASTI
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पुलिस को बेझिझक बताएं परेशानी, मदद अवश्य मिलेगी
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- पटेल एसएमएच हॉस्पिटल एंड आयुष पैरामेडिकल कॉलेज में अपराजिता अभियान के तहत पुलिस की पाठशाला आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। पुलिस आपके लिए है और आपके साथ है। अपनी परेशानी पुलिस को बताने में संकोच न करें। संकट के समय में बेझिझक पुलिस से संपर्क करें, मदद अवश्य मिलेगी। ये बातें पुलिस क्षेत्राधिकारी कलवारी अनिल कुमार सिंह ने शनिवार को पटेल एसएमएच हॉस्पिटल एंड आयुष पैरामेडिकल कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित पुलिस की पाठशाला में कहीं।
कार्यक्रम में सिंह ने महिला सुरक्षा हेल्पलाइन 1090, डायल 100, पॉवर एंजिल, एंटी रोमियो स्क्वॉड की जानकारी दी। छात्राओं से कहा कि निर्भीक होकर आप कॉलेज जाएं। रास्ते में किसी प्रकार की परेशानी हो तो तत्काल हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। आप का नाम व पता गुप्त रखा जाएगा। आपके बताए स्थान पर पुलिस शीघ्र पहुंचेगी और आपकी मदद करेगी। सीओ ने अपना सीयूजी नंबर भी दिया। कॉलेज प्रबंधक डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि आत्मविश्वास से हर मंजिल हासिल की जा सकती है। निदेशक डॉ. आलोक रंजन वर्मा ने कहा कि महिलाएं आज घर की ड्योढ़ी लांघ कर राजनीति, देश सेवा, अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में पुरुष से कदमताल कर रही हैं। इस दौरान 67 छात्राओं ने शपथपत्र भरकर अपराजिता मुहिम को समर्थन दिया। कार्यक्रम में वंदना चौधरी, जग नरायन वर्मा, राजीव शुक्ला, डॉ राजेश चौधरी, शिव प्रसाद चौधरी, विनय कुमार, अमरेश चौधरी, वीरेंद्र वर्मा, राजेश सिंह, रितेश, अरुण कुमार, मनीष वर्मा, उत्कर्ष दुबे, उमेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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अनोखी पहल है अपराजिता
- आयुष पैरामेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य मनोज मिश्रा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में अपराजिता अभियान एक विशिष्ट पहल है, जिसका उद्देश्य ही महिलाओं को सशक्त बनाना है। ऐसे कार्यक्रमों से छात्राओं का आत्मबल बढ़ता है।
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संकोच छोड़ें महिलाएं
- गौतम बुद्ध मुराली देवी बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य संयोगिता वर्मा का कहना है कि महिलाएं संकोचवश बहुत कुछ छुपा लेती हैं। प्रताड़ना सहन करती हैं। महिलाओं के लिए जरूरी है कि अपनी बात खुलकर बताएं।
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आगे बढ़ रही हैं महिलाएं
- कवि व साहित्यकार विनोद उपाध्याय का कहना है कि यत्र नार्यास्तु पूज्यंते रमंत्रे तत्र देवता की हमारी संस्कृति रही है। पौराणिक काल में भी महिलाओं ने मेधा का परचम लहराया है। मध्यकाल में परिस्थितियों के विपरीत होने से घर की ड्योढ़ी तक रह गईं। आज समय फिर बदला है। महिलाएं निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
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समय-समय पर हों ऐसे कार्यक्रम
- सहायक अध्यापक सविता श्रीवास्तव का मानना है कि अपराजिता के तहत ऐसे जागरूकता अभियान हर कॉलेज और कस्बे में आयोजित होने चाहिए। इससे छात्राओं में आत्मबल बढ़ता है। उनके अंदर छिपा अज्ञात भय दूर होता है।
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