कप्तानगंज के ग्राम पंचायत बिहरा का बदहाल अमृत सरोवर संवाद
बस्ती। जिले में लाखों रुपये खर्च कर विकसित किए गए अमृत सरोवर बदहाली का शिकार हैं। कई सरोवर झाड़ियों से घिरे हैं तो कुछ में पानी तक नहीं है। कहीं इंटरलॉकिंग अधूरी पड़ी है तो कहीं पाथवे, बैरिकेडिंग और सूचना बोर्ड का पता नहीं है।
ऐसे में जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को सुबह-शाम टहलने और बैठने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने की योजना भी सवालों के घेरे में है। मनरेगा (वीबी जी रामजी) के तहत पिछले चार वर्षों में जिले के 313 तालाबों की खोदाई और सुंदरीकरण कर उन्हें अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया गया।
इन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसका उद्देश्य भूजल स्तर को बनाए रखना और कम जलस्तर वाले क्षेत्रों में उसे ऊपर उठाना था। लेकिन देखरेख के अभाव में कई सरोवरों की स्थिति कुछ ही महीनों में खराब हो गई। कप्तानगंज ब्लॉक क्षेत्र के कई अमृत सरोवरों में सरपत और कंटीली झाड़ियां उग आई हैं।
पानी के बजाय झाड़ियों का कब्जा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर काम शुरू तो कराया गया, लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया। इंटरलॉकिंग अधूरी है। पाथ-वे नहीं बनने से लोगों को टहलने की सुविधा भी नहीं मिल रही है। कुछ जगह बैरीकेडिंग के पिलर और योजना से संबंधित बोर्ड भी गायब हैं। पौधरोपण अभियान का भी असर दिखाई नहीं दे रहा है। बिहरा में पानी नहीं, झाड़ियों का कब्जा : कप्तानगंज। ग्राम पंचायत बिहरा के अमृत सरोवर की स्थिति बदहाल है। तालाब में पानी नहीं है और चारों तरफ झाड़ियां उगी हैं। सरोवर के लिए लगाए गए बोर्ड और अन्य व्यवस्थाएं भी नजर नहीं आतीं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के विकास पर धन खर्च होने के बावजूद उसकी नियमित देखरेख नहीं हो रही है।
ग्राम प्रशासक सुबाष चौधरी ने बताया कि तालाब का चयन अमृत सरोवर के लिए किया गया था। बरसात के बाद इसकी साफ-सफाई कराई जाएगी।