गरीब परिवार की एक बुजुर्ग महिला के बीमार होने पर उसे किसी तरह बहू ने अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज तो हो गया, मगर चलने में असक्त बुजुर्ग के लिए जब बहू ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने की बात की तो अस्पताल से निराशा हाथ लगी। मजबूरन मरीज को बहू ठेले पर लाद कर पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव पहुंची।
घटना तहसील क्षेत्र की पचारी कला गांव की है। यहां की चंद्रमति की 50 वर्षीय सास पुष्पा के पेट में अचानक तेज दर्द होने लगा। वह उसे गंभीर स्थिति में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचीं। यहां केंद्र प्रभारी डॉ. आनंद कुमार मिश्र ने दवा आदि दी, लेकिन गरीबी और बीमारी से चल पाने में अक्षम पुष्पा को घर पहुंचाने का इंतजाम बहू के पास नहीं था। सो उसने चिकित्सालय के एक कर्मचारी से एंबुलेंस दिलाने को कहा, मगर कर्मचारी ने उसे समझाया कि ऐसी कोई व्यवस्था चिकित्सालय प्रशासन नहीं उपलब्ध करा पाएगा। बहू के लिए बुजुर्ग सास को घर तक ले जाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। ऐसे में उसने कस्बे में स्थित एक ठेले वाले को मरीज को घर तक पहुंचाने के लिए तैैयार कर लिया और फिर उसे लाद कर चल दी। रास्ते भर जिसने भी इस मंजर को देखा अस्पताल प्रशासन को कोसता रहै।
बहू ने बताया कि गरीबी के चलते वह जैसे-तैसे सास को चिकित्सालय तक पहुंचा दिया, लेकिन इतना पैसा नहीं था कि उन्हें रिक्शा या अन्य वाहन से घर पहुंचाया जा सके। ऐसे में ठेला पर लाद कर चले आए। वैसे मैंने चिकित्सालय में एंबुलेंस की बात की थी, मगर वहां इसकी किसी भी व्यवस्था से इंकार कर दिया गया।
इस बारे में सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद कुमार मिश्र का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में केवल गर्भवती को घर से लाने व उसे घर पहुंचाने के लिए एंबुलेंस है। इसके अलावा केवल बीमार को लाने के लिए 108 एंबुलेंस जाता है, लेकिन मरीज को घर पहुंचाने की कोई व्यवस्था अब तक नहीं है।