बस्ती। आशा के चयन में पक्षपात के आरोप में स्थानांतरित बीसीपीएम को जांच में क्लीनचिट मिल गई है। इससे अब स्थानांतरण रद्द हो सकता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गौर में तैनात ब्लॉक कम्यूनिटी प्रासेस मैनेजर (बीसीपीएम) रामजीत चौरसिया पर आरोप था कि एक आशा के चयन में उन्होंने धन लेकर पक्षपात किया था। मामला सीएमओ तक पहुंचा था। बीसीपीएम को सीएचसी गौर से डीपीएमयू कार्यालय अटैच किया गया था और जांच शुरू हुई थी।
सीएमओ के आदेश पर डीसीपीएम दुर्गेश मल्ल और एसीएमओ आरसीएच डॉ. एके गुप्ता ने प्रकरण की जांच की। जिसमें टीम ने गयाजीतपुर बैरीखाला के तत्कालीन प्रधान से बयान दर्ज किया था। तत्कालीन वीडीओ से भी बयान लिया था। दोनों ने अपना पक्ष रखा, जिसमें चयन-प्रक्रिया को सही बताया था।
जांच टीम ने बीसीपीएम पर लगे आरोप को खारिज करते हुए सीएमओ को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसके बाद सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बीसीपीएम को क्लीनचिट दे दिया है। अब बताया जा रहा है कि बीसीपीएम का स्थानांतरण रद्द किया जा सकता है। सीएमओ ने एमओआईसी गौर को पत्र में कहा है कि आशा का चयन गाइडलाइन के नियमानुसार किया गया है, जो टीम ने सत्य बताया है।
जो आरोप लगे हैं उसे खारिज बताया गया है, ऐसे में एमओआईसी संबंधित बीसीपीएम से कार्य ले सकते हैं। सीएमओ ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यह क्लीनचिट दी गई है। डीसीपीएम दुर्गेश मल्ल ने बताया कि बीसीपीएम के न होने से सभी राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं एनएचएम के कार्यक्रम में गौर ब्लॉक का इंटीकेटर खराब है। इसमें सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।