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Basti News: नमाज पढ़ने वालों पर होती है अल्लाह की रहमत नाजिल

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कुदरहा। रमजान का माह-ए-मुबारक चल रहा है। रमजान को तीन अशरों में तकसीम किया गया है। अभी पहला अशरा बीत चुका है जो कि रहमत का अशरा होता है। मान्यता है कि रमजान के शुरू के 10 दिनों में जो बंदा रोजे रखता है और नमाज पढ़ता है, उस पर अल्लाह की खास रहमत नाजिल होती है।
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दूसरा अशरा मगफिरत का होता है। यानी दूसरे अशरे में 11 रमजान से 20 रमजान तक अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है। रमजान के दूसरे अशरे की एक मख़सूस दुआ है जो कि रोजाना पढ़नी चाहिए। विकास खंड कुदरहा के नगर पंचायत गायक स्थित मदरसा जामिया अरबिया अशरफिया के प्रिंसिपल मौलाना मोहम्मद शरीफ ने बताया कि रमजान के शुरू के 10 दिन गुजरने के बाद 28 फरवरी 2026 की शाम से दूसरा अशरा शुरू हो गया है।
इसमें अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत करता है और उनके गुनाहों को माफ करता है। इसी तरह तीसरा अशरा यानी रमजान माह के अंतिम 10 दिन जहन्नम की आग से आजादी के होते हैं, इसलिए सभी को चाहिए कि वह रमजान के दूसरे अशरे में कसरत के साथ कुरआन की तिलावत करें और अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगे।
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