बस्ती। मुस्लिम समुदाय के प्रसिद्ध धर्म स्थलों पर हर साल बस्ती कोतवाली क्षेत्र के तुरकहिया के रहने वाले नसीम कौम के लोगों को जियारत कराने ले जाते हैं। उनकी अगुवाई में 50 से 60 तीर्थ यात्री बस से निकलते हैं।
इस बार भी परंपरागत यात्रा के लिए उन्हीं की अगुवाई में जा रहे थे। लेकिन, रास्ते में ही यात्री भीषण हादसे के शिकार बन गए। वहीं नसीम भाई बाल-बाल बच गए, मगर हादसा इतना भीषण था कि उन्हें इसकी सुधि बुध नहीं रही।
जिला अस्पताल में भर्ती नसीम ने बताया कि वह हर साल कौम के लोगों को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों पर देवा शरीफ से लेकर अजमेर और पाकिस्तान सीमा तक जियारत कराने ले जाते हैं। उनके साथ बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर जिले के तमाम तीर्थ यात्री जाते हैं।
प्रत्येक यात्री से चार हजार रुपये बतौर किराया लिया जाता है। इस पैसे से वह बस बुक करते हैं। इस बार भी 15 दिसंबर से 15 दिनों का टूर था और कुल 60 यात्रियों को लेकर जाना था। इसके लिए बस्ती के ही लालगंज थाना क्षेत्र के हलुआपार की एक यात्री बस की बुकिंग की थी।
सोमवार को मुंडेरवा से लोगों को बस में बैठाते हुए नसीम गाड़ी लेकर सहजनवा तक गए। वहां से यात्रियों को बैठाने के बखिरा, बेलवा होते हुए रुधौली पहुंचे। यहां बस में यात्रियों की संख्या 40 हो गई। शेष 10 यात्री बस्ती में बैठने थे।
नसीम ने बताया कि बस्ती पहुंचने से तीन- चार किमी पहले ही हादसा हो गया। हम बस के अंदर केबिन के पास खड़े थे, तभी उछल कर बस से बाहर आकर गिर पड़े। सड़क पर बेहोशी की हालत में पड़े रहे। कुछ देर के बाद होश आया तो हाथ पैर काम नहीं कर रहा था। अस्पताल पहुंचा तो पता चला हाथ टूट गया है, शरीर में कई जगहों पर चोटें आई है।
उन्होंने बताया कि हादसे के बाबत उन्हें भी कुछ भी याद नहीं है। बस इतना एहसास है कि हादसा बहुत भीषण था। जेब में रखा पर्स भी उसी अफरा-तफरी में कहीं गायब हो गया। पर्स में 70-75 हजार रुपये भी थे।
केवल मोबाइल ही रह गया है। इसके जरिये लोगों ने फोन करके परिवार को जानकारी दी। नसीम ने कहा कि कितने मरे हैं इसका अंदाजा हमें भी नहीं है। बस सुनने में आ रहा है कि काफी लोग मर गए, मरने वालों को अल्लाह जन्नत अता करें।