बस्ती। टोल प्लाजा पर वसूली के लिए अनुबंध में 21.50 करोड़ रुपये स्टांप
शुल्क की कमी के मामले में 43 करोड़ रुपये की आरसी जारी होने के बाद भी
वसूली नहीं हो पाने पर शासन ने एआईजी स्टांप को नागपुर भेजने का निर्देश
दिया है। एनएचएआई से अनुबंध करने वाली फर्म नागपुर की है।
लगभग डेढ़
साल पहले कलेक्टर कोर्ट ने अनुबंधकर्ता अयोध्या गोरखपुर एसएमएस टोल
प्राइवेट लिमिटेड नागपुर पर स्टांप कमी का 21.50 करोड़ और इतनी ही धनराशि
का अर्थ दंड लगाया है। कमिश्नर पीके सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर
डीआईजी स्टांप से एआईजी स्टांप बस्ती को नागपुर भेजने का निर्देश दिया गया
है। डीआईजी स्टांप की ओर से इस आशय का पत्र एआईजी स्टांप को प्राप्त करा
दिया गया है।
डीएम अनिल कुमार दमेले ने बताया कि चौकड़ी और बड़ेवन
स्थित टोल प्लाजा के संचालक ने एनएचएआई से टोल वसूली के लिए मात्र सौ रुपये
के स्टांप पेपर पर अनुबंध करा लिया था। मामला पकड़ में आने पर एआईजी
स्टांप की ओर से जिलाधिकारी न्यायालय में स्टांप कमी का वाद दाखिल किया
गया। वाद में 21.50 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क की कमी का आरोप लगाया गया
था।
बताया कि अनुबंध पत्र और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के
पश्चात जिलाधिकारी कोर्ट ने 16 जुलाई 2014 को फर्म से भारतीय स्टांप
अधिनियम के तहत 21.50 करोड़ रुपये के साथ 21.50 करोड़ रुपये का अर्थ दंड
सहित कुल 43 करोड़ रुपये की वसूली का निर्णय सुनाया। साथ ही फैसले की तिथि
से भुगतान की तिथि तक डेढ़ फीसदी ब्याज लेने का भी निर्णय सुनाया।
बताया
कि जब वसूली नहीं हुई तो आरसी जारी की गई। वसूली के लिए आरसी को नागपुर के
डीएम के पास भेज दिया गया। उसके बाद भी जब इस मामले कोई कार्रवाई नहीं हुई
तो शासन ने एआईजी स्टांप को वसूली की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नागपुर
भेजने का निर्देश दिया।