कुदरहा के मईपुर गांव में कटान करती सरयू संवाद
बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया, लेकिन तटवर्ती गांवों में खतरा अभी टला नहीं है। जलस्तर घटने के साथ ही नदी की धारा ने विक्रमजोत, दुबौलिया और कुदरहा क्षेत्र में कटान तेज कर दी है। कई स्थानों पर कृषि योग्य जमीन और फसलें नदी में समा रही हैं। तटबंधों पर भी दबाव बना हुआ है। बाढ़ खंड की टीमें संवेदनशील स्थानों पर मरम्मत कार्य में जुटी हैं। दुबौलिया क्षेत्र में सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे पहुंचने के बाद मैरुंड, सुविका बाबू और आंशिक टेढ़वा गांव में पानी कम हुआ है। इससे ग्रामीणों को कुछ राहत मिली है, लेकिन पगडंडियों पर कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल बना हुआ है। जमीन दलदली होने से लोगों को परेशानी हो रही है।
केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर खतरे के निशान 92.73 मीटर से 25 सेंटीमीटर नीचे था। जलस्तर कम होने के बावजूद तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। ग्रामीण अभी भी खेती-किसानी के काम से नाव के जरिये आवागमन कर रहे हैं। पानी उतरने के बाद गांव के आसपास कीचड़ फैलने से संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ गया है। पशुओं के लिए हरे चारे का संकट बना हुआ है।