बस्ती। मंडल में सांसद और विधायक निधि से स्कूलों को आवंटित किए जाने वाले
धन के मामले में नियमों का उल्लंघन हो रहा है। स्कूल प्रबंधकों से मात्र सौ
रुपये के स्टांप पर लाखों का सामान्य अनुबंध करा लिया गया है।
जबकि
अनुबंध रजिस्टर्ड होना चाहिए। इससे प्रति अनुबंध दस से बीस हजार रुपये के
राजस्व की हानि हो रही है। इतना ही नहीं, बिना रजिस्टर्ड अनुबंध की कोई
वैधता नहीं रहती है। मामला संज्ञान में आने के बाद कमिश्नर पीके सिंह ने
मंडल के तीनों जिलाधिकारियों को जांचकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
क्षेत्र
के विकास के लिए सरकार सांसद को प्रतिवर्ष पांच करोड़ और विधायक को डेढ़
करोड़ रुपये मुहैया कराती है। इस रकम से निजी स्कूलों के लिए कक्ष, बरामदा
निर्माण के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
नियमानुसार
सांसद और विधायक निधि से स्कूलों में होने वाले निर्माण कार्यों की
कार्यदायी संस्था कोई एजेंसी न होकर स्कूल के प्रबंधक होते हैं। इसीलिए
सरकार ने धन आवंटन से पहले स्कूलों के प्रबंधकों से रजिस्टर्ड अनुबंध कराने
का नियम बनाया है ताकि धन का उपयोग हो सके, और उसकी वैधता बनी रहे।
रजिस्टर्ड
अनुबंध कराने के पीछे सरकार की मंशा राजस्व प्राप्ति की भी है। नए नियम के
तहत अगर किसी संपत्ति का रजिस्टर्ड अनुबंध होता है तो स्कूल प्रबंधकों को
सरकार को फीस के रूप में दस से बीस हजार रुपये देने पड़ते हैं।
मगर
जो रिपोर्ट मिल रही है, उसमें स्कूल प्रबंधकों से मात्र सौ रुपये के
स्टांप पर अनुबंध करा लिया गया है। इस तरह का एक मामला बस्ती जिले में काफी
समय पहले प्रकाश में भी आ चुका है। उस मामले में प्रबंधक को आवंटित धनराशि
का चार गुना जुर्माना देना पड़ा था। जानकार बताते हैं कि चूंकि माननीयों
की निधियों की जांच नहीं होती है।
इसी का फायदा उठाकर नियम विरुद्ध
अनुबंध कर राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही है। कमिश्नर पीके सिंह ने बताया
कि इस तरह की शिकायतें मिली है। जांच के आदेश दिए गए हैं।
13 स्कूलों को दे दिया डेढ़ करोड़ से अधिक
बस्ती।
वित्तीय वर्ष 2015 व 2016 में बस्ती जिले के तीन विधायकों ने विधायक निधि
से 13 निजी विद्यालयों को एक करोड़ पचास लाख रुपये दे दिया। इनमें सदर
विधायक नंदू चौधरी ने सबसे अधिक पांच स्कूलों को 89.50 लाख रुपये दिए।
कप्तानगंज के विधायक रामप्रसाद चौधरी ने पांच स्कूलों को 49 लाख और रुधौली
विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने तीन स्कूलों को 12 लाख रुपये दिए।