तहसील मुख्यालयों पर ग्राम न्यायालय के गठन को लेकर आंदोलित अधिवक्ताओं ने सोमवार को 18वें दिन भी अपना आंदोलन जारी रखा। जनपद न्यायालय के गेट के बाहर बड़ी संख्या अधिवक्ता एकत्र हुए और सभा की। इसके बाद न्याय मार्ग पर सड़क जाम कर विरोध जताया और सभा की।
सभा में अधिवक्ताओं ने कहा कि ग्राम न्यायालय के गठन से न्यायालय की गरिमा प्रभावित होगी और वादकारियों को मुश्किलें आएंगीं। जिले का पहले ही दो बार बंटवारा हो चुका है। इससे अधिवक्ताओं और वादकारियों की समस्याएं बढ़ी हैं। ऐसे में यदि ग्राम अदालत का गठन हो गया तो समस्याएं और बढ़ जाएंगीं।
तहसील मुख्यालय पर ग्राम न्यायालय के गठन की कार्यवाही को समाप्त किया जाए। दिन में एक बजे के करीब सिविल बार के लॉन में सभी अधिवक्ता संघों की साधारण सभा की बैठक सिविल बार के अध्यक्ष रमाशंकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई, इसमें अधिवक्ताओं ने ग्राम अदालत के गठन अव्यावहारिक बताया और साधारण सभा के सदस्यों ने कार्यबहिष्कार बढ़ाने की बात कही।
इस पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कार्य बहिष्कार 18 दिसंबर तक जारी रहेगा। उसी दिन एक बजे बैठक कर अगली रणनीति तय की जाएगी।
इस मौके पर सिविल बार के महामंत्री प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद चौधरी, जनपद बार के अध्यक्ष जवाहर लाल मिश्र, महामंत्री रविशरण सिंह, यंगबार के अध्यक्ष भानुप्रताप शुक्ल, कमिश्नर्स बार के अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव, अयोध्या प्रसाद शुक्ल, दिनेश नरायन त्रिपाठी, शरद चतुर्वेदी, अरविंद चौधरी, वंशीधर पांडेय, अखंड पाल, जगदंबा चतुर्वेदी, पावेंद्र गिरि, जितेंद्र श्रीवास्तव, कौशलेंद्र पाल, अरविंद नरायन पांडेय, राकेश मिश्र, रामसुरेश वर्मा, रामविनय शुक्ल, राजेंद्र श्रीवास्तव, अविनाश कुमार, दुर्गा प्रसाद उपाध्याय, रामरतन पांडेय, प्रभाकर मिश्र, रमापति उपाध्याय, अशोक कुमार मनीष श्रीवास्तव, राजेश विक्रम सिंह, दुर्गा उपाध्याय, रामसागर, विजय कुमार आदि मौजूद रहे।