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आशिक मिजाज दरोगा प्रकरण: गांव में जांच करने पहुंचे एडीजी

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आशिक मिजाज दरोगा प्रकरण:
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गांव में जांच करने पहुंचे एडीजी
पीड़िता के भाई को उपलब्ध कराया गया गनर
सीएम से मिलकर पक्षपात का आरोप, दूसरी एजेंसी से जांच की मांग
कोतवाली क्षेत्र की युवती ने 21 मार्च को उत्पीड़न की दर्ज कराई थी शिकायत
जांच में मुख्य आरोपी दरोगा दीपक को छोड़कर सभी हो चुके हैं बरी
एडीजी बोले जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से लिया जाएगा निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बर्खास्त हो चुके आशिक मिजाज दरोगा के प्रकरण में सोमवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब अपर पुलिस महानिदेशक अखिल कुुमार आईजी एके राय और एसपी आशीष श्रीवास्तव के साथ पीड़िता के गांव जा पहुंचे। पीड़िता ने पुलिस की जांच में पक्षपात का आरोप लगाते हुए किसी दूसरी एजेंसी से पूरे मामले की दुबारा जांच कराने की मांग की है। पीड़िता रविवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पुलिस पर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने और दबाव बनाने की शिकायत की थी। उसका आरोप है कि मुकदमे की शामिल 12 पुलिस कर्मियों व राजस्व कर्मियों को तफ्तीश में बरी कर दिया गया।
सीएम के निर्देश पर इन आरोपों की जांच करने यहां पहुंचे एडीजी ने पीड़िता व उसकी भाभी का बयान दर्ज किया। एडीजी ने बताया कि पीड़िता के भाई को जान का खतरा बताने के मद्देनजर उसे गनर मुहैया करा दिया गया है। उसके व अन्य संबंधितों से बयान लिए गए हैं। एडीजी के मुताबिक पूरी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। दूसरी एजेंसी से जांच कराने के बाबत शासन स्तर से निर्णय लिया जाएगा। विवेचना पर उठाए गए सवालों के संबंध में उनका कहना है कि इसकी समीक्षा की जा रही है। पीड़िता के परिवार पर दर्ज कराए गए मुकदमे अगर फर्जी पाए जाते हैं तो उसकी 31 जुलाई तक जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। जांच में जो भी मुकदमा फर्जी मिलेगा, उसे नियमानुसार समाप्त कर दिया जाएगा।
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10 जुलाई को बर्खास्त हुआ था दरोगा
गोरखपुर जिले के चौरीचौरा थानांतर्गत सोनबरसा के रहने वाले आरोपी दरोगा दीपक सिंह को आईजी रेंज अनिल कुमार राय ने पुलिस सेवा से दस जुलाई 2021 को बर्खास्त कर दिया था। हाई प्रोफाइल केस की विवेचना पहले सीओ सिटी आलोक प्रसाद को सौंपी गई थी। कुछ दिनों बाद एडीजी गोरखपुर के निर्देश पर संतकबीरनगर के सीओ खलीलाबाद अंशुमान मिश्र को विवेचना ट्रांसफर कर दी गई थी। उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर तैयार की चार्जशीट में मुख्य आरोपी बर्खास्त दरोगा दीपक सिंह को अभियुक्त बनाया है। अन्य आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उनका नाम मुकदमे से निकाल दिया गया। सीजेएम कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में 23 जुलाई 2021 को आरोपी बर्खास्त दरोगा को न्यायालय में हाजिर होने के लिए तलब किया है।
इन पर दर्ज हुआ था केस
शिकायतकर्ता की तहरीर पर 20 मार्च 2020 को कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें तत्कालीन चौकी प्रभारी सोनूपार दीपक सिंह के अलावा कोतवाली में ही तैनात रहे दीपक के भाई दरोगा राजन सिंह, तत्कालीन कोतवाल रामपाल यादव, तत्कालीन महिला थाना प्रभारी शीला यादव, दरोगा अभिषेक सिंह, आरक्षी संजय कुमार, आलोक कुमार, पवन कुशवाहा, अवधेश सिंह, महिला आरक्षी दीक्षा यादव, नीलम सिंह, हल्का लेखपाल शालिनी सिंह व कानूनगो सतीश के साथ दो-तीन अन्य अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पहले जांच सीओ सिटी को सौंपी गई थी और बाद में इसे संतकबीरनगर जनपद स्थानांतरित कर दिया गया था।
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31 मार्च 2020 को प्रकरण की हुई थी शुरूआत
कोरोना की पहली लहर के दौरान 31 मार्च 2020 को इस प्रकरण की शुरूआत हुई। कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली युवती ने सोनूपार चौकी प्रभारी रहे दीपक सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए आला अफसरों से शिकायत की थी कि 31 मार्च 2020 को वह दादी की दवा लेने जा रही थी। सोनूपार चौकी पर तैनात तत्कालीन प्रभारी दारोगा दीपक सिंह ने उसे रोका और गाड़ी के कागजात चेकिंग के बहाने उसका मोबाइल नंबर ले लिया था। उसी दिन से दारोगा उसके मोबाइल नंबर पर फोन करने लगा था। युवती ने आपत्ति जताई तो पट्टीदारी के विवाद को आधार बनाकर उसके घरवालों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए गए।
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