आचार्य रामचंद्र शुक्ल जयंती पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण करते गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शु
कलवारी। हिंदी साहित्य के गौरव एवं समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पैतृक गांव अगौना में बृहस्पतिवार को उनकी 141वीं जयंती मनाई गई। यहां उनके नाम से स्थापित आचार्य रामचंद्र शुक्ल बालिका इंटर कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण का उन्हें नमन किया। कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के पक्षधर थे।
महेश शुक्ल ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने उस कठिन समय में हिंदी साहित्य को चुना जब देश गुलामी के दौर में था। उस समय देश में अंग्रेजी और उर्दू भाषा का बोलबाला रहा। उनके पिता चंद्रबली शुक्ल भी चाहते थे कि वह अंग्रेजी व उर्दू पढ़कर अफसर बन जाए। किंतु प्रकृति को शायद यह मंजूर नहीं था। उन्होंने हिंदी साहित्य को चुना, उनके लेखन शैली इतनी उत्कृष्ट निकली कि भारत ही नहीं पूरी दुनिया उसकी कायल बनी। आचार्य जी ने हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में भरपूर योगदान दिया।