बस्ती। करोड़ों रुपये खर्च कर नगर पंचायत हर्रैया और बभनान में बनवाए गए आसरा आवास लावारिस पड़े हैं। डूडा की ओर से वर्ष 2015-16 में हर्रैया में 84 और बभनान में बनवाए गए 192 आवासों के रख-रखाव की जिम्मेदारी से नगर पंचायतें अपना पल्ला झाड़ रही हैं।
वहीं डूडा कुछ काम अधूरा होने का हवाला देते हुए हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थता जता रहा है। ऐसे में देखरेख के अभाव में ये आवास खंडहर होने के कगार पर हैं।
सोमवार को हर्रैया के दो बेसहारा बुजुर्गों के भूख-प्यास से तड़पते मिलने के बाद मिले आसरा आवास भी चर्चा में आ गए हैं। बता दें कि सपा सरकार के शासनकाल के दौरान वर्ष 2015-16 में नगर पंचायत हर्रैया की करीब सवा दो एकड़ बेशकीमती जमीन पर 417.78 लाख रुपये की लागत से आसरा आवास बनवाया गया था। कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (संतकबीरनगर यूनिट-20) द्वारा बनाए गए इस चार मंजिला भवन की गुणवत्ता पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। बिजली और पानी का कनेक्शन न होने के कारण नगर पंचायत प्रशासन ने इसे आज तक हैंडओवर नहीं लिया है।
हालत यह है कि आधिकारिक तौर पर हस्तांतरित होने से पहले ही आसरा आवास जर्जर हो चुका है। हालांकि वर्ष 2019-20 में तत्कालीन एसडीएम/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा ने कोरोना काल में जरूरतमंदों को राहत देते हुए 78 फ्लैट आवंटित कर दिए थे और बाद में 100 शैय्या अस्पताल के निर्माण से बेघर हुए छह परिवारों को भी आवास दे दिया गया।