- मुंडेरवा स्थित अमृत हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला की मौत का मामला
- जांच में ढिलाई, रिकार्ड तक खंगाल नहीं पाए जिम्मेदार
बस्ती। मुंडेरवा स्थित अमृत हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला की मौत के सात दिन बाद भी पुलिस ने नामजद संचालक, चिकित्सक और अन्य स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाई है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दो कर्मी को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, शेष फरार बताए जा रहे हैं। वहीं, सप्ताहभर में जांच लंबित है। आगे की कार्रवाई भी रिपोर्ट न मिलने पर लटकी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की कमेटी ने प्रथमदृष्टया अस्पताल पर लगे आरोप को सही ठहराते हुए अस्पताल को सील कर दिया था। पीड़ित की तहरीर पर संचालक डॉ. मनीष श्रीवास्तव समेत अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज है। वहीं, जांच के लिए सीएमओ ने अलग से अपनी कमेटी बनाई है, जिनमें तीन सदस्यीय जांच टीम शामिल है। सीएमओ का कहना है कि तीन दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट मांगी गई थी। मगर, अभी तक रिपोर्ट नहीं दी गई है। वहीं, अभी तक अस्पताल में इलाज से जुड़े दस्तावेज तक मुहैया नहीं करा पाई है।
बता दें कि, मुंडेरवा के लोहदर गांव निवासी अनिल चौधरी अपनी पत्नी को खुजली होने पर 14 मई रात में अमृत अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप था कि डॉक्टर ने तीन इंजेक्शन गलत लगा दिया था, जिससे महिला की मौत हो गई। वहीं, दूसरा प्रकरण जिगिना चौराहे स्थित अस्पताल का है। यहां भी एक प्रसूता की लापरवाही के चलते जान चली गई। बताया गया कि जगदीशपुर मंझरिया निवासी अलका वर्मा को भर्ती कराया गया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। आरोप लगा है कि गलत इंजेक्शन के चलते मौत हुई है।
मामले में डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह जांच कर रहे हैं। मगर चार दिन बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाई। अभी तक सिर्फ अस्पताल की आईपीडी, ओपीडी सेवा पर रोक है। बताया गया कि पूर्व में इसी अस्पताल में बच्चे की मौत हुई थी। उस समय पंजीकरण नहीं था। विभाग ने बिना कोई ठोस कार्रवाई के पंजीकरण कर दिया और मामला दब गया। दोबारा उसी अस्पताल में फिर लापरवाही से घटना हुई। अब फिर अस्पताल का पंजीयन 30 अप्रैल को खत्म हो गया, बावजूद इसके अस्पताल संचालित होता रहा। अभी तक अभिलेख और किस डॉक्टर के नाम पंजीकरण था विभाग नहीं बता पा रहा है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम का कहना है कि
दोनों प्रकरण की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। बिना वैध पंजीयन के अस्पताल संचालित होते पाए जाएंगे तो टीम बनाकर फिर से गोपनीय जांच कराई जाएगी।
- डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।