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Basti News: चखना गली में बार की तर्ज पर सज रही महफिल

Wed, 15 May 2024 03:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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आसपास रहने वाली महिलाओं, बच्चों का जीना दुश्वार
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आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। स्टेशन के पास वाली दो फीट की संकरी गली चखना गली के नाम से मशहूर है। यहां छोटी-छोटी दुकानों में बार की तर्ज पर शौकीनों की महफिल सजती है। थाने के दलालों का काकस ऐसा है कि प्रशासन की सख्ती, पुलिस की मुस्तैदी यहां दूर-दूर तक फटक नहीं पा रही है। अगल-बगल की आबादी में महिलाओं, बच्चों का रहना मुश्किल है। लोगों काे एतराज बहुत है, लेकिन आवाज उठाने की हिम्मत किसी में नहीं है। क्योंकि विरोध का परिणाम उलटा होता है।
रेलवे स्टेशन के सामने स्थित इटैलिया मोहल्ले का दाग अभी मिटा नहीं है। पुरानी बस्ती थाना जाने वाले मार्ग के एक तरफ दुकानों के पीछे आबादी हैं। दुकानों के बीच से ही इस आबादी में जाने के लिए दो से तीन फीट की संकरी इंटरलॉकिंग गली है। करीब 15 से 20 फीट की गहरी गली पार करने के बाद चखना वाली गली आ जाती है। यहां का मंजर देख लगता है कि पुलिस के पहरा से दूर रहने वाले किसी सुदरवर्ती क्षेत्र में आ गए हैं।
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इस गली में आधा दर्जन दुकानें बार की तर्ज पर सज रही है। बाहर तरह-तरह के चटपटे वेज-नानवेज खाद्य सामग्रियों का स्टॉल और अंदर स्टूल-बेंच पर बैठकर रंगीन महफिल सजाने की पूरी व्यवस्था है। सुबह 11 बजे के बाद यहां चहल-पहल बढ़ जाती है। शाम ढलने के बाद पूछिए मत। देर रात शौकीनों के धमाल के बीच हो-हल्ला का माहौल बना रह रहा है। ऐसे में आसपास के लोग घरों से बाहर निकलने में परहेज करते हैं। खासकर महिलाएं और बच्चे इस माहौल से ज्यादा तंग है।
मोहल्ले के आनंद कहते हैं कि विरोध करने का कोई फायदा नहीं है। यहां सभी दुकानें दलालों के संरक्षण में है। पुलिस भी कुछ नहीं बोलती है। आम आदमी आवाज उठाएगा तो उलटा उसी की फजीहत हो जाती है। 70 वर्षीय किशोरी ने बताया कि साहब यह इटैलिया मोहल्ले का हिस्सा है। हम पूरी उम्र गुजार दिए, लेकिन यहां का दाग कभी धुलते हुए नहीं देखा। पांच साल पहले तक सड़क के उस पार का मोहल्ला देह व्यापार के लिए चर्चित हुआ करता था। कुछ सख्ती हुई तो इस धंधे पर अंकुश लगा, लेकिन नशे की लती लोगों का जमावड़ा अभी कम नहीं हुआ है।
अरविंद कुमार ने बताया कि यहां के लोग का रोजी-रोजगार का पैटर्न अब भी नहीं बदला है। शौकीनों के लिए हर तरह का इंतजाम करने को ही लोग रोजी-रोजगार समझ बैठे हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान नई पीढ़ी को है। हम लोग बच्चों को इस गली में खेलने भी नहीं आने देते हैं।
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धर्मशाला और धार्मिक स्थल का भी ख्याल नहीं
इटैलिया की जिस गली को अब चखना वाली गली के नाम से जानते हैं वह कभी धर्मशाला और मां काली मंदिर की गली के नाम से प्रसिद्ध थी। धंधेबाजाें ने इसका भी ख्याल नहीं रखा। चिरंजी लाल कहते हैं कि पहले यहां धर्मशाला में दूर-दराज से आने वाले यात्री ठहरते रहे। अब इसकी उपयोगिता खत्म हो गई है। पुलिस यदा-कदा आती है। कुछ दुकानदारों के कान में मंत्र फूंककर चली जाती है।
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कोट
इस मोहल्ले के कुछ हिस्से का माहौल लंबे समय से खराब है। श्रद्धालुओं की मदद से मंदिर की सुरक्षा जैसे-तैसे कर पाते हैं। कुत्ते-बिल्ली बगल की गली में फेंके गए मांस के टुकड़े मंदिर परिसर से लेकर लोगों के घरों के सामने तक बिखेरते हैं। सबसे अधिक समस्या नशे के लती लोगों के जमावड़ा से होता है।
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-पं. संजय शुक्ल, पीठाधीश्वर, मां काली शक्ति पीठ मंदिर
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स्टेशन के आसपास संवेदनशील स्थलों की सघनता से चेकिंग कराई जाएगी। यदि अवांछनीय तत्व पकड़े जाएंगे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। आबादी वाले क्षेत्र में माहौल बिगाड़ने की इजाजत किसी को नहीं है। मोहल्लेवासियों को बेहतर माहौल दिलाने के लिए पुलिस सहयोग करेगी।
-विनय चौहान, सीओ सिटी।
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