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वाल्टरगंज मिल को नहीं दी चीनी बेचने की अनुमति

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बस्ती। वांल्टरगंज चीनी मिल के दो अधिकारी शुक्रवार को डीएम से मिले और उनसे सील किए गए गोदाम को खुलवाने और उसमें रखे चीनी की ब्रिकी करने की मांग की। डीएम ने अनुमति देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि पहले किसानों के बकाए गन्ने का भुगतान करो उसके बाद अनुमति दी जाएगी। काफी मान-मनव्वल के बाद डीएम ने इस शर्त पर अनुमति देने के लिए तैयार हुए कि पहले भुगतान के बारे में शपथ-पत्र लाओ। मिल के अधिकारी डीसीओ के इंकार करने के बाद डीएम से आवेदन करने पहुंचे थे। इस मिल पर किसानों का 15.70 करोड़ रुपये बकाया है।
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बता दें कि गन्ना किसानों के बकाए के आरोप में वाल्टरगंज चीनी मिल के गोदाम को डीएम अनिल कुमार दमेले के आदेश पर जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी की टीम ने एक हफ्ते पहले सील कर दिया था। उसके बाद मिल के अध्याशी और मिल के वित्त प्रबंधक के खिलाफ 3/7 के तहत केस दर्ज भी कराया गया। डीएम ने बताया कि मिल पर 15.70 का वह रकम बकाया है, जिसे मिल को चीनी बेचकर 85 फीसदी का भुगतान किसानों को करना था। मगर मिल ने भुगतान नहीं किया। इसके चलते मिल के गोदाम को पहले सील किया गया उसके बाद उसके अध्याशी और वित्त प्रबंधक के खिलाफ धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। कहते हैं कि मिल ने उनसे 10000 क्विंटल चीनी बेचने की अनुमति मांगी है, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। मिल के अधिकारियों से भुगतान संबंधी शपथ-पत्र देने को कहा गया है। कहते हैं कि जब तक मिल शपथ-पत्र नहीं देगी, तब तक उसे चीनी बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। डीएम ने बताया कि भुगतान न होने से एक ओर जहां किसानों की बेटियों की शादी रुकी हुई है, वहीं मिल प्रबंध तत्र किसानों के गन्ने के मूल्य से अन्य कार्य कर रहे हैं। कहते हैं कि बकाया वाली मिलों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ी तो मिल के मालिक के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
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