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चुनाव की तैयारियों अंतिम रूप देने में जुटे अफसर

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बस्ती। आचार संहिता लगने के दूसरे दिन कलेक्ट्रेट और विकास भवन सहित अन्य सरकारी दफ्तरों का माहौल बदला हुआ था। दफ्तरों में राजनीतिक चर्चा अधिक होे रही थी। दिन भर चुनावी गणित और सरकार बनाने सहित चुनाव के बाद कौन अधिकारी रहेगा या जाएगा, इस पर चर्चा होती रही। अधिसूचना जारी होने के चलते अधिकारियों का राजनेताओं के पीछे भागने का सिलसिला भी थम गया है। वे सुकून के साथ कार्यालयों में बैठकर कामकाज निपटाते रहे। वहीं फरियादियों को भी अपनी बात कहने का पूरा समय मिला। डीएम ने असलहों के लाइसेंस की सिफारिश करने वाले नेताओं से राहत की सांस ली। डीएम और एडीएम के चेंबर में पत्रावलियों की भरमार रही। गुरुवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने जब अधिकारियों के दफ्तरों का जायजा लिया तो हर जगह चुनाव को लेकर ही चर्चा सुनी गई।
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सुबह 10.30 बजे डीएम अनिल कुमार दमेले के कार्यालय में अन्य दिनों की तरह फरियादियों की भीड़ रही। इसी बीच रुक-रुक कर चुनाव से संबंधित पत्रावलियों को भी निपटाते और अफसरों को दिशा-निर्देश देते रहे। अन्य दिनों की तरह उनके सामने कुर्सियाें पर नेता बैठे नहीं मिले। एक भी राजनेता किसी की सिफारिश लेकर नहीं आया। जनता दरबार में कोई पेंशन की समस्या लेकर आया तो कोई जमीन विवाद लेकर आया था। दूर-दराज से आने वाले फरियादियों की संख्या अधिक रही। लेखपाल संघ के पदाधिकारी भी अपनी समस्या को लेकर पहुंचे। मीडिया वालों की भीड़ भी रही। एक फरियादी ने डीएम से पूछा कि क्या आचार संहिता लगने के बाद जनता की नहीं सुनी जाती है? इस पर डीएम ने कहा कि यह लोगों का भ्रम है कि आचार संहिता लगने के बाद अधिकारी सिर्फ चुनाव से संबंधित कार्य ही करते हैं। जबकि आयोग का स्पष्ट आदेश है कि चुनाव के समय जन समस्याओं से संबंधित कोई कार्य बाधित न हो। कहा कि कोई भी अधिकारी चुनाव का बहाना बनाकर जनहित की उपेक्षा नहीं कर सकता है।
11.10 बजे :
एडीएम प्रताप सिंह भदोरिया अपने कुर्सी पर फाइलों को निपटाने में व्यस्त दिखे। हां यहां पर फरियादियों की संख्या न के बराबर रही। पता चला कि जब डीएम अपने चेंबर में बैठे रहते हैं एडीएम के पास बहुत कम लोग आते हैं।
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11.30 :
कमिश्नर कार्यालय में कमिश्नर अरविंद कुमार द्विवेदी कार्यों को निपटाते देखे गए। आचार संहिता लगने का असर कमिश्नर कार्यालय में देखने को मिला। फरियादियों की संख्या न के बराबर रही। यहां पर चुनाव को लेकर ही चर्चा होती रही।
11.45 :
निर्वाचन कार्यालय यही वह कार्यालय है जहां से लोकसभा चुनाव की सारी प्रक्रिया शुरू होती है। यहां पर सबसे अधिक लोगों को सक्रिय देखा गया। यहां पर चुनाव से संबंधित जानकारी लेने वालों की भी भीड़ रही।
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