बस्ती। पंचायती राज विभाग में तैनात 2500 सफाई कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इनको दिसंबर माह से अब तक वेतन नहीं मिला है। डीएम के निर्देश के बाद भी उनके वेतन की व्यवस्था नहीं हो पाई।
अनुदान संख्या 14 जो कि सामान्य/पिछड़ा वर्ग से संबधित है। उसमें धनराशि न होने के कारण यह समस्या आई है। अनुसूचित जाति के लिए अनुदान संख्या 83 में काफी धनराशि बची है। मगर विभाग उसकी धनराशि से सामान्य और पिछड़े वर्ग के सफाई कर्मचारियों को वेतन नहीं देना चाहता। ऐसे में करीब 2500 सफाई कर्मचारी पिछले तीन माह से वेतन से वंचित हैं। वेतन न मिलने से उनकी होली भी बेकार रही। उत्तर प्रदेश पंचायत सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अजय आर्य की अगुवाई में पिछले दिनों इनका एक प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें बताया कि जब अनुसूचित जाति के अनुदान 83 में बजट नहीं था तो डीपीआरओ कार्यालय की ओर से सामान्य मद 14 से उन्हें वेतन दिया गया। जब अनुदान सं. 83 में पर्याप्त धन हो गया तो उससे सामान्य और पिछड़ों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। अजय ने कहा कि यदि सामान्य के मद से एससी को वेतन दिया जा सकता है तो एससी के मद से सामान्य को क्यों नहीं। डीएम ने सीडीओ, डीपीआरओ और सीटीओ को कार्रवाई के लिए लिखा। इसके बाद भी सफाई कर्मचारियों का वेतन नहीं मिला। अंतत: अनुदान संख्या 83 में बची करीब दो करोड़ से अधिक की धनराशि शासन को वापस कर दी गई। डीपीआरओ समरजीत यादव ने कहा कि उन्हाेंने अपने स्तर से इसके लिए प्रयास किया था। सीटीओ को पत्र लिखकर अनुदान संख्या 83 में उपलब्ध बजट से अनुदान संख्या 14 के लोगों को वेतन दिए जाने आ अनुरोध किया था मगर सीटीओ ने उनके अनुरोध को नियमानुसार न होने के कारण स्वीकार नहीं किया।