फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कमरे में समीक्षा, सड़क पर प्रसव

विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के महाप्रंबधक डॉ. हरिओम दीक्षित, डीजीएम डॉ. उषा गंगवार, सिफ्सा की डीजी डॉ. वीना वाजपेयी, डीजीएम डॉ. माया उपरेती के अलावा एडी, जेडी दो दिनों से जिले में घूमकर मिशन की योजनाआें की जांच कर रहे हैं। एक तरफ जब वे परिवार कल्याण सभागार में सीएमओ, एनआरएचएम के मंडलीय परियोजना प्रबंधक व डीपीएम बैठकर योजनाआें की समीक्षा कर रहे थे तो दूसरी तरफ सड़क के किनारे जननी सुरक्षा योजना की ऐसी की तैसी हो रही थी। महिला अस्पताल के सामने सड़क पर बच्चा जनने के बाद फूलमती सरकार की योजनाआें को आईना दिखा रही थी। स्थिति यह थी कि न तो उसके तीमारदारों के पास एक धेला बचा था और न ही जच्चा बच्चा सुरक्षा की कोई गारंटी थी। सपा मुखिया के जन्मदिन व जिले मुख्यालय पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग के आला अफसराें की मौजूदगी का भय न तो पीएचसी और न ही महिला अस्पताल में मौजूद लेडी डॉक्टर और कर्मचारियों को था। यही नहीं, घटना के बाद दोष एक दूसरे के सिर मढ़ने की कोशिश शुरू हो गई।
विज्ञापन


तो ऐसे दे रहे जच्चा-बच्चा सुरक्षा की गारंटी
सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे अस्पताल कर्मी
अमर उजाला नेटवर्क
बस्ती। एनआरएचएम के तहत सुरक्षित व संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और जच्चा-बच्चा सुरक्षा की गारंटी का डंका पीटा जा रहा है। मगर सरकार की मंशा पर खुद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार पानी फेर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में गर्भावस्था में टीकाकरण, दवा व जांच के साथ ही प्रसव का पूरा खर्च मिशन वहन कर रहा है। मंडल के तीनों जिलाें में को मिलाकर कुल 2 करोड़ बीस हजार पांच सौ रुपये आवंटित किए गए थे। इसमें बस्ती को 84 लाख 96 हजार मिले हैं। 350 रुपये प्रति प्रसव के हिसाब से कंज्यूमेबल सुविधा जिसमें आयरन की गोली, दवाएं और अन्य चीजें दी जानी है। साथ ही अल्ट्रासांउड के लिए प्रति केस 100 रुपये दिए जाने हैं। प्रसव के लिए लाने ले जाने के लिए नि:शुल्क एंबुलेस सेवा है। अस्पताल में नार्मल डिलिवरी पर सौ रुपये प्रतिदिन की दर से तीन दिनों का 300 रुपये मिलने हैं। सीजेरियन में सात दिनों का भुगतान इसी दर से होना है। अस्पताल में भोजन की व्यवस्था, 250 रुपये परिवार के सदस्य को भी मिलना था। बच्चों की देखभाल 200 रुपए प्रति केस की दर से दिए जाने हैं।

मंत्री ने खुद स्वीकारी थी दलाली की बात
यूं तो महिला अस्पताल में दलालाें ने कई प्रसूता की जान से खिलवाड़ कर अपने मंसूबों को पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। जैसे ही कोई मरीज ओपीडी या इमरजेंसी की ओर बढ़ता है, महिला व पुरुष दलाल उसके पीछे लग जाते हैं। 19 नवंबर को जिला अस्पताल के औचक निरीक्षण में जिले की चिकित्सा व्यवस्था में दलालों के दखल की बात सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने खुद कबूल की थी।
विज्ञापन


आशा बहुओं पर है दलाली का आरोप
महिला अस्पताल में निजी अस्पतालों व पैथालोजी सेंटर के दलाल प्रसूता की जान से खिलवाड़ तो करते ही हैं। इसमें विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी समझी जाने वाली आशा बहुओं की भी संलिप्तता रहती है। अस्पताल की सीएमएस व नर्सें गुरुवार को इस सच को बयां कर रही थी।

बेबस हैं सीएमएस
अस्पताल की सीएमएस डॉ. सरोजबाला कहती हैं कि ग्रामीण इलाकों की आशा-बहुएं दलालों से मिलकर प्रसूता को निजी सेंटराें पर ले जाने का काम करती हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर किसी सहयोगी कर्मचारी का इस धंधे पर रोक लगाने में कोई सहयोग न मिलने से वे लाचार हैं।
कई साल से ठप है अस्पताल में अल्ट्रासांउड
महिला अस्पताल में अल्ट्रासांउड मशीन कई साला से धूल फांक रही है। रेडियोलाजिस्ट की तैनाती न होने से प्रसूता को जिला अस्पताल, ओपेक कैली रेफर किया जाता है। हालांकि सीएमएस ने अप्रैल में निरीक्षण में आए भारत सरकार के स्पेशल डीजी डॉ. वाईएस कोठारी की टीम के अलावा जुलाई में प्रदेश के निदेशक संचारी रोग डॉ. एमके गुप्ता, जेडी डॉ. एमके अग्रवाल से भी अल्ट्रासांउड मशीन ठीक कराने व रेडियोलाजिस्ट की तैनाती करने की मांग की। मगर कुछ भी नहीं हुआ।

अस्पताल में नहीं हैं कोई पीडियाट्रिशियन
महिला अस्पताल में प्रसव के बाद नवजाताें की देखभाल के लिए कोई पीडियाट्रिशिन तैनात नही है। इससे नवजाताें की जान की हिफाजत भगवान भरोसे ही है।

दोषी के खिलाफ होगी कार्रवाई : सीएमओ
डॉ. एसपी दोहरे कहते हैं कि टीम के साथ दिन भर निरीक्षण के बाद दो बैठकें होने से मौके पर तत्काल नहीं जा सका। डिप्टी सीएमओ को भेजकर महिला को अस्पताल में भर्ती कराकर सुविधा प्रदान करने को कहा। पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें