बस्ती। परशुरामपुर में हुए अनाज घोटाले में विभाग अब उन अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी में है, जिन्होंने घोटाले को उजागर करने की हिम्मत दिखाई। अफसरों से सवाल किए जा रहे हैं कि कार्रवाई किसके आदेश पर की गई, इसकी जानकारी विभाग को क्यों नहीं पहले दी गई, जांच में खाद्य विभाग के लोगों को शामिल क्यों नहीं किया गया और गोदाम प्रभारी के विरुद्ध केस दर्ज क्यों नहीं कराया गया। जवाब देने के लिए फूड कमिश्नर ने डीएसओ को 15 दिनों का समय दिया है।
बता दें कि 25 अक्टूबर 2012 को डीएसओ पूरन सिंह ने परशुरामपुर स्थित खाद्य विभाग के गोदाम पर नवंबर के लिए आवंटित अंत्योदय, बीपीएल और एपीएल योजना का गेहूं, चावल और चीनी स्टाक का सत्यापन किया। सत्यापन में 50 लाख रुपये का सामान गायब मिला। रिपोर्ट डीएम को की गई। डीएम के निर्देश पर गोदाम का संचालन करने वाले दो प्राइवेट व्यक्तिओं के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया। डीएम के निर्देश पर स्टाक कम मिलने से लेकर मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई को अति गोपनीय रखा गया। इसके बाद खाद्य विभाग और आपूर्ति विभाग में एक तरह से शिकायतों का दौर शुरू हो गया। कार्रवाई में खाद्य विभाग के लोगों को शामिल न करने की ऊपर तक शिकायत हुई। प्रकरण की जांच करने आए अपर आयुक्त अनिल कुमार दमेले ने डीएसओ को तलब किया था और पूछा था कि कार्रवाई में खाद्य विभाग के लोगों को क्यों नहीं शामिल किया गया और गोदाम प्रभारी के विरुद्ध क्यों नहीं मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की गई। बताते हैं कि इस प्रकरण को लेकर कुछ देर तक बैठक का माहौल गर्म रहा। डीएसओ को इसका लिखित जवाब देना पड़ा। अब फूड कमिश्नर अर्चना अग्रवाल ने डीएसओ से स्पष्टीकरण मांगा है। डीएसओ ने बताया कि फूड कमिश्नर के सवाल का जवाब दिया जा रहा है। बताया कि जो भी कार्रवाई परशुरामपुर के मामले में की गई वह डीएम के निर्देश पर की गई। साथ ही कार्रवाई की पूरी जानकारी ई-मेल से खाद्य विभाग के अफसरों को समय से दे दी गई।
10 दिन में दो अधिकारी हुए निलंबित
बस्ती। अनाज घोटाले के मामले में पिछले दस दिनों के भीतर मंडल के दो जिला खाद्य विपणन अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिर चुकी है। पहली गाज शोहरतगढ़ में हुए एक करोड़ रुपये के गोलमाल में सिद्धार्थनगर के प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी कमलेश पांडेय पर नौ अक्टूबर को गिरी। दूसरी गाज परशुरामपुर में हुए 50 लाख के घोटाले के आरोप में संतकबीरनगर के जिला खाद्य विपणन अधिकारी प्रभाकांत द्विवेदी पर 19 अक्टूबर को गिरी। यह अलग बात है कि दोनों मामलों की कार्रवाई में पीड़ित अफसर विभाग पर मनमानी करने और दोहरा माप दंड अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। इसे लेकर विभाग की किरकिरी हो रही है।