बस्ती। ग्राम पंचायत के खाते में धन मौजूद होने के बाद भी मनरेगा से काम न कराए जाने के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। जिले के नौ ब्लाकों में करीब पौने तीन करोड़ रुपए अवशेष हैं, मगर ग्राम प्रधान काम कराने में हीलाहवाली कर रहे हैं। सीडीओ ने इन सभी ग्राम पंचायतों के प्रधान, सेक्रेटरी और टीए की 28 नवंबर को बैठक बुलाई है।
ग्राम पंचायतों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि ग्राम पंचायतों में धन होने के बाद भी पंचायत सेक्रेटरी और प्रधान मनरेगा का कार्य नहीं करा रहे हैं। शासन ने ऐसी ग्राम पंचायतों को चिन्हित करने का निर्देश दिया है जिनमें चार लाख रुपये से ऊपर की धनराशि पड़ी है। इस दौरान पाया गया कि जिले में नौ ब्लाकों की 48 ग्राम पंचायतों के खाते में दो करोड़ 70 लाख 60 हजार रुपये बैलेंस हैं। इनमें किसी-किसी ग्राम पंचायत के खाते में नौ-नौ लाख रुपए पड़े हैं।
शासन के रुख को देखते हुए सीडीओ ने बीडीओ बनकटी, बस्ती सदर, बहादुरपुर, गौर, कप्तानगंज, रामनगर, रुधौली, सल्टौआ गोपालपुर और सांऊघाट को पत्र भेजा है। कहा गया है कि 2012-13 में निर्धारित लेबर बजट के अनुरूप धनराशि की उपलब्धता के बावजूद इसे व्यय नहीं किया जा रहा है। इसके चलते मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पीडी वीर पाल ने बताया कि 28 को आयोजित बैठक में ग्राम पंचायतों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। उनसे अब तक धनराशि न खर्च करने का तथ्यात्मक कारण पूछा जाएगा। बैठक में अनुपस्थित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
बड़ी धनराशि दबाए रखने वाली ग्राम पंचायतें
बनकटी ब्लाक की कबरा ग्राम पंचायत के पास 9.61 लाख, रुधौली ब्लाक की डड़वा तिवारी के पास 9.17 लाख, बस्ती की रैकवार ग्राम पंचायत के पास 9.08 लाख, गौर के इटबहरा ग्राम पंचायत के पास 8.59 लाख, बनकटी की भौरा ग्राम पंचायत के पास 7.85 लाख, रुधौली की केरौना ग्राम पंचायत में 7.68 लाख, बनकटी के भैंसा पांडेय में 6.87 लाख, सांऊघाट की मरवटिया ग्राम पंचायत के खाते में 6.58 लाख रुपए अवशेष हैं।