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गरीबों को नहीं मिल रहा तहसील दिवस का लाभ

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बस्ती। महरीपुर निवासी मंदिर के पुजारी रामदीन साधु ने निराश मन से कहा कि ऐसे तहसील दिवस से क्या फायदा जहां पर फरियादियों को एक ही समस्या के लिए बार-बार आना पडे़। कहा कि वह पिछले एक साल से रास्ता खाली कराने के लिए तहसील दिवस से थाने का चक्कर लगा रहे हैं। हर जगह निराशा ही हाथ लगी। मंगलवार को तहसील दिवस में केवल साधु की नहीं, ऐसे कई लोग मिले जो अक्सर तहसील दिवस में अधिकारियों के आगे हाथ जोडे़ खडे़ मिलते हैं।
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कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम दुधौरा की 17 साल की वंदना को गांव के कुछ लोगों ने जमीन विवाद में बेरहमी से पीट दिया। बकौल लड़की, शिकायत लेकर जब वह पुलिस चौकी पहुंची तो वहां से उसे यह कहते हुए भगा दिया गया कि तहसील दिवस में जाओ। फिर वह कोतवाली गई वहां भी उसकी नहीं सुनी गई। तहसील दिवस में भी उसे कार्रवाई का आश्वासन ही मिला। लालगंज थाना के देवरी बरूअवा की 60 साल की अख्तरूनिशां अपनी बहु और तीन बच्चों के साथ शिकायत लेकर पहुंची थीं। बताया कि गांव के कुछ लोग उन्हें घर बनाने से रोक रहे हैं। थाने जाने पर उसे भगा दिया गया।

‘कालिका’ के हश्र पर अफसरों की चुटकी
मुख्यालय के अफसरों के लिए कालिका तिवारी का हश्र अफसरों की चुटकी का विषय बन चुका है। बगल में काले रंग का बैग दबाए कालिका तिवारी पांच साल से इंसाफ के लिए भटक रहे हैं। तहसील दिवस में उनकी एसपी आनंद कुलकर्णी से तल्ख अंदाज में बातचीत हुई। लालगंज थानाक्षेत्र के नौना निवासी कालिका तिवारी पुलिस महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्टा लिए घूमते हैं। 2008 में लालगंज थाने में उनके खिलाफ दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज हुआ। बकौल तिवारी, उन पर पेशबंदी में फर्जी मुकदमा कायम किया गया। यही से शुरू हुई यात्रा संतकबीरनगर के एएसपी की जांच रिपोर्ट पर आकर ठहरी है। जिसमें मुकदमा झूठा पाया गया। इससे पहले तीन सीओ और एएसपी बस्ती केस की विवेचना में चार्जशीट लगा चुके हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अधिकारी भी आफ रिकार्ड उन्हें निर्दोष बताते रहे लेकिन किसी ने कलम नहीं चलाई। अब वे जांच रिपोर्ट के आधार पर चार्जशीट वापस कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
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कुल प्रार्थनापत्र: 289-निस्तारण केवल छह
तहसील दिवस की कामयाबी का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि 289 प्रार्थनापत्रों में केवल छह का ही निस्तारण हो सका। जबकि कमिशभनर, डीएम, एसपी, सीडीओ, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के अलावा अन्य तमाम आला अधिकारी खुद मौजूद थे। जनता सवाल उठा रही थी कि आला अफसरों के होते हुए जब निस्तारण का आंकड़ा गोते लगा रहा है तो बाकी क्या होगा।

इन लोगों ने भी दिए प्रार्थनापत्र
: शहर के पिकौरा शिव गुलाम मोहल्ला निवासी बुजुर्ग महिला दुर्गावती देवी भूखंड संख्या एक व दो जो राजस्व अभिलेखों में ताल भीटा के रूप में दर्ज है, की पैमाइश कराने और अनधिकृत कब्जा हटवाने के लिए अपने पुत्र दीनानाथ शुक्ल के साथ तहसील दिवस में पहुंची थीं।
: दुग्ध उत्पादक किसान एवं दुग्ध समितियों के लोगों ने सामान्य प्रबंधक को संबोधित प्रार्थनापत्र तहसील दिवस में दिया।
मौके पर जाकर अधिकारी करें निस्तारण: कमिश्नर
भानपुर। तहसील दिवस की अध्यक्षता सीआरओ देवीदास ने की। 48 मामले आए जिनमें मौके पर तीन का निस्तारण हुआ। एसडीएम भूपेंद्र मिश्र, तहसीलदार सुभाषमणि त्रिपाठी, एनटी वृजेश त्रिपाठी, जेई लाल बहादुर, एसओ सोनहा वृजेश यादव सहित अन्य मौजूद रहे। रूधौली प्रतिनिधि के मुताबिक तहसील दिवस की अध्यक्षता एसडीएम बसंत कुमार गुप्त ने की। यहां पर कुल 33 मामले आए जिसमें मौके पर निस्तारण की प्रगति शून्य रही।
कमिश्नर और डीएम ने लगाई चौपाल
बस्ती। तहसील दिवस के बाद कमिश्नर सुशील कुमार और डीएम एस. मथुशालिनी ने अफसरों के साथ सदर विकास खंड के दयालपुर गांव में चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी। गांव वालों से विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली।
कमिश्नर ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्रों तक पहुंचाना अफसरों की जिम्मेदारी है। अधिकारी पेंशन का धन खाते में डाल कर चुप न रहें बल्कि, बैंक में खातेदार के खातों में प्रविष्टि भी कराएं। केवल कागजों में धन का हस्तांतरण न करें। सीडीओ एसपी अंजोर, एडीएम राम एकबाल सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के. बालाजी, अपर आयुक्त आत्माराम सगर व अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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