बस्ती। ग्राम प्रधान बदले तो उन्होंने पुराने प्रधानों के समय में नियुक्त रसोइयों को भी हटाना शुरू कर दिया है। अपने चहेते को रसोइया बनाने के लिए उन्होंने किसी को भी नहीं बख्शा। ऐसा ही एक मामला सदर विकास खंड की गनेशपुर ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय मुहम्मदपुर का है।
विधवा शकुंतला देवी को गनेशपुर के पूर्व प्रधान रहमान के कार्यकाल में प्राथमिक विद्यालय मुहम्मदपुर में रसोइया के पद पर नियुक्ति मिली थी। बाद में प्रधानी बदली और अशर्फीलाल प्रधान बने। उनके कार्यकाल में सबसे पहले रसोइयों को हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। रसोइया विधवा शकुंतला देवी का पहले नवीनीकरण के लिए दिए गए आवेदन पत्र को गायब कर दिया गया। बाद में उसे टीबी का रोगी बताकर रसोइया पद से हटा दिया गया। इसकी शिकायत पर बीडीओ को जांच के आदेश दिए गए, मगर बीडीओ ने स्वयं जांच न कर स्थानीय सेक्रेटरी और एडीओ सेक्टर से मामले की जांच कराई और एसडीएम सदर को उसकी ओर से आवेदन करने और टीबी रोगी बताकर उसे रसोइया पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। जबकि उसका जांच के दौरान न तो उसका बयान लिया गया और न ही उन्होंने कोई मेडिकल कराया या फिर रिपोर्ट देखी। ऐसे में पूरी जांच प्रक्रिया संदिग्ध हो गई। शकुंतला का कहना है कि उसने मेडिकल कराया है, इसमें कहीं भी टीबी रोग की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि उसे इस आधार पर क्यों हटाया गया?
प्रधान अशर्फीलाल ने कहा कि शकुंतला ने फार्म और फोटो नहीं दिया और वह टीबी की पुरानी मरीज है। ऐसे में उसे कैसे रसोइया के पद पर रखा जाता। वहीं बीडीओ हुबलाल ने कहा कि उन्होंने इस मामले की जांच स्वयं नहीं की थी। यदि आरोप सही हैं तो वे इस बार स्वयं मामले की जांच करेंगे। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।