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Basti News: बांट दिए 96 लाख...किनके खाते में भेजे पता ही नहीं, जांच अटकी

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बस्ती। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में हुई सेंधमारी की जांच करीब महीने भर बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। जांच टीम का कहना है कि 96 लाख रुपये किन लोगों के खाते में भेजे गए यह स्पष्ट करने के लिए कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है।
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ऑनलाइन उपलब्ध रिकॉर्ड में खाता नंबरों के अंतिम चार अंक ही दिखने से लाभार्थियों के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। जांच टीम ने लीड बैंक मैनेजर से सहयोग मांगा है। मातृ वंदना योजना के तहत फर्जी लाभार्थियों के खाते में रकम भेजकर 96 लाख रुपये की हेराफेरी की गई है। रुधौली विकास खंड में 17 सौ से अधिक खातों में दूसरी किस्त के रूप में छह-छह हजार रुपये भेजे गए हैं।
हालांकि, इनमें डेढ़ से दो सौ ही पात्र लाभार्थी होंगे। डीएम ने इस मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। जांच टीम में शामिल सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, सीटीओ अशोक कुमार प्रजापति और जिला सूचना विज्ञान अधिकारी शामिल हैं।
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जांच टीम अब तक भुगतान प्रक्रिया की प्रारंभिक जानकारी ही जुटा पाई है। इसके अलावा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। लाभार्थियों का पता नहीं मिल पा रहा है। इससे अब साइबर सेल की मदद लेने की बात कही जा रही है।
डीपीओ से ओटीपी आने संबंधी स्क्रीनशॉट, बैंक डिटेल समेत अन्य अभिलेख मांगे गए हैं। जांच टीम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कई गांवों में 20 से 25 लाभार्थियों की सूची निकाल कर आंगनबाड़ी और सहायिका से मिलान कराया गया तो पता चला कि लाभ लेने वाली कई महिलाओं का गांव से कोई जुड़ाव ही नहीं है।
वहीं, डीपीओ राजेश कुमार ने जांच टीम को बताया है कि भुगतान ऑनलाइन हुआ है मगर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं दे पाया है जिससे पता चले कि भुगतान किनके खातों में किया गया। डीपीओ ने बताया कि जो अभिलेख जांच टीम की ओर से मांगे गए हैं, उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सीडीपीओ ऑफिस पहुंचकर कागजात खंगाल चुकी है टीम : सीआरओ, सीटीओ और डीसी एनआईसी की टीम सीडीपीओ रुधौली के ऑफिस पहुंचकर सितंबर में हुए अत्याधिक आवेदन और भुगतान से जुड़े अभिलेख खंगाल चुकी है।
हालांकि, सिर्फ यह बताया गया कि ऑनलाइन भुगतान हुआ है। उससे जुड़े अभिलेख नहीं मिलने से मामला संदिग्ध होता जा रहा है। पोर्टल के जरिये जांच की गई मगर खातों के सिर्फ चार अंक दिखने से कोई नतीजा नहीं निकला।
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