गौर। ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के मुताबिक बिजली सप्लाई देने का सरकारी फरमान हवा हवाई साबित हो रहा है। बिजली का यहां कोई शेड्यूल नहीं है। क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से दिन में बमुश्किल दो से तीन घंटे बिजली मिल सकी है। अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं।
ग्रामीण अंचलों में 18 घंटे बिजली देने का दावा तार-तार हो रहा है। गांव हो या बाजार हर जगह बिजली की बेतहाशा कटौती से परेशानी बढ़ गई है। अधिकतर कटौती ऐसे समय हो रही है, जब पढ़ाई का समय या फिर व्यापार का समय होता है। पिछले एक सप्ताह से हरदी पावर हाउस के 230 गांव, गौर के 180 गांव और बभनान पावर हाउस 250 गांवों में बिजली सप्लाई दो से तीन घंटे ही मिल सकी है। जबकि रात की सप्लाई में हर 10 मिनट पर बिजली कटौती की जा रही है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों में नाराजगी है। आचार्य नरेंद्र किसान पीजी कॉलेज बभनान के प्राचार्य डॉ. प्रभाकर मिश्र ने बताया कि दिन में बिजली सप्लाई नाममात्र की मिल रही है। यदि कभी विभाग के कर्मचारियों से बात करने की कोशिश किया जाता है तो उसका स्विच आफ होता है।
व्यापारी राधेश्याम जायसवाल ने कहा कि सरकार का गांवों में 18 घंटे बिजली देने का फरमान केवल कागजी है। बिजली आने-जाने का कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है। चनईपुर के अखिलेश पांडेय कहते हैं कि बिजली कटौती उस समय होती है जब बच्चों की पढ़ाई का समय होता है। पिछले कई दिनों से दिन में बिजली नहीं मिल पा रही है, रात में यदि बिजली आती है तो उसमें भी कटौती की जाती है। निगम के बभनान एसडीओ लाल बहादुर यादव ने बताया कि जितनी सप्लाई मिलती है, उतनी आपूर्ति की जाती है। रही बात कटौती की तो यह हरैया से की जाती है। इसके लिए उच्चाधिकारी आदेश देते हैं। वैसे कभी-कभी लोकल फाल्ट के चलते कटौती करनी पड़ती है। आकस्मिक कटौती का कोई रोस्टर नहीं होता है, कंट्रोल से जो आदेश मिलता है उसका पालन किया जाता है।