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तूल पकड़ रहा घोलहा मंदिर का भूमि विवाद

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बस्ती। शिवलिंग रखकर सदर तहसील के घोलहा घाट मंदिर की जमीन कब्जा करने का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्व विभाग के ढुलमुल रवैये के चलते कब्जा करने वालों का हौसला बुलंद है। कब्जा करने वालों की धमकी व तेवर से डरे मंदिर के महंत श्रीधर दास ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार की। साथ ही अयोध्या मंदिर के मूल पीठ को भी साधु-संतों को भी अवगत कराया है। कमिश्नर, डीआईजी, डीएम, एसपी से गुहार करके हार चुके मंदिर के महंत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर मंदिर की जमीन से कब्जा मुक्त कराने की मांग की है।
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हियुवा जिलाध्यक्ष अज्जू हिंदुस्थानी को भी ज्ञापन देकर हस्तक्षेप की मांग की है। महंत का कहना है कि काफी कोशिश के बाद एसडीएम, तहसीलदार, सीओ एसओ भारी दलबल के साथ पहुंचे और आधे से ज्यादा अवैध कब्जा हटवाया। चूंकि वहां कब्जा करने वालों ने छप्पर आदि बना लिया है जिसे तत्काल हटाया नहीं जा सकता। उसके लिए अधिकारियों ने दो दिन का अल्टीमेटम दिया था।
शुक्रवार को उसकी समय सीमा भी बीत गई लेकिन कब्जा नहीं हटा। सीएम को भेजे ज्ञापन में महंत ने कहा है कि कब्जा करने वाले आरपार की लड़ाई की धमकी दे रहे हैं। इससे वह दहशत में हैं। इस प्रकरण को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि एक ओर अवैध कब्जे को लेकर प्रदेश सरकार ने अभियान छेड़ रखा है, जबकि प्रशासन कब्जा करने वालों को शह देने में जुटा है।
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क्या है प्रकरण
क्षेत्रवासियों के विशेष आग्रह पर श्रीराम नगरी अयोध्या के राम घाट स्थित श्यामा सदन की ओर से मनोरमा नदी के किनारे स्थित डेवाडीहा ग्राम पंचायत में वर्षों पहले भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। गाटा 64 में 0.130 रकबे में साकेत राजसदन मंदिर नाम से मंदिर बना है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वहां श्री सीताराम की सेवा करने वाले राम मनोहर आदि के परिवार वालों ने वहां चाय की दुकान खोल ली। कुछ दिन बाद वहां बिल्डिंग मैटीरियल की दुकान खोल दी। जिस पर मोरंग, गिट्टी आदि रखकर कब्जा कर लिया। जब शासन ने अवैध कब्जे को लेकर अभियान शुरू किया तो 20 जुलाई को रातों रात शिवलिंग स्थापित करके सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश किया। हालांकि कमिश्नर, डीआईजी, डीएम और एसपी के संज्ञान में आते ही कलई उतर गई।
बिगड़ सकता है क्षेत्र का माहौल
घोलहा घाट मंदिर के मुद्दे को प्रशासन यूं ही हल्के में लेता रहा तो कभी भी क्षेत्र का माहौल बिगड़ सकता है। आसपास के निरंजनपुर, कड़सरी, रामपुर, कुसुम्ही, रखौना, बहादुरपुर, कटरुआ, रखौना आदि ब्राह्मण-ठाकुर बाहुल्य गांवों में इसे लेकर काफी सुगबुगाहट है। क्षेत्र के लोगों की घोलहा मंदिर से आस्था जुड़ा होने की वजह से खतरा है कि कहीं दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आई तो पुलिस-प्रशासन को जवाब देते नहीं बनेगा। डीआईजी राकेश चंद्र साहू का कहना है कि पुलिस की वहां की गतिविधि पर नजर है।
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