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डीडीओ और डीपीआरओ आमने-सामने

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बस्ती। विकास भवन में स्थित जिला विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालयों में एक दूसरे विभाग के कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की होड़ लगी हुई है। अगर डीडीओ के सेक्रेटरी के विरुद्ध कोई कार्रवाई होती है तो पलट कर डीपीआरओ के सेक्रेटरी के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। कार्रवाई करने के मामले में दोनों विभागों अधिकारी आमने-सामने हैं। इसका खामियाजा दोनों विभागों के कर्मचारी भुगत रहे हैं। एक तरह दोनों विभागों में अघोषित वार छिड़ा हुआ है।
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ग्राम पंचायतों में जिला विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के सेक्रेटरी काय कर रहे हैं। डीडीओ कार्यालय के सेक्रेटरी को ग्राम विकास अधिकारी और डीपीआरओ के सेक्रेटरी को ग्राम पंचायत अधिकारी कहा जाता है। इन दोनों अधिकारियों का अधिकार समान है। दोनों ग्राम के विकास में अपना योगदान देते हैं। शासन और प्रशासन को दोनों विभागों के सेक्रेटरियों के विरुद्ध अनियमित कार्य करने की शिकायतें मिल रही है। चूंकि डीपीआरओ के सेक्रेटरी अधिक संख्या में इस इनकी शिकायतें भी अधिक रहती है। जब भी कोई मौका मिलता अधिकार कार्रवाई करने में नहीं हिचकते हैं। हाल ही में डीपीआरओ ने शौचालय निर्माण में गड़बड़ी पाए जाने पर भुवरनिरंजपुर हल्का के ग्राम विकास अधिकारी राकेश पांडेय के विरुद्ध सरकारी धन गबन के आरोप में कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया। जब कि डीडीओ कार्यालय के लोंगो का कहना था कि इसमें मुकदमा दर्ज कराने जैसा कोई गंभीर आरोप नहीं बनता था। शुक्रवार को अंत्येष्टि स्थल निर्माण के गोलमाल में नरायनपुर के ग्राम पंचायत अधिकारी नरोत्तम के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने का आदेश हुआ। इसे विभाग के लोग बदले की कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं। यह तो एक उदाहरण भर है। कई ऐसे मामले हैं, जो जांच के दायरे में हैं। विकास भवन के अन्य विभागों के अधिकारी भी मानते हैं कि दोनों विभागों के बीच काफी दिनों से एक दूसरे विभाग के कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का चलन है। जब भी मौका मिलता है अधिकारी कार्रवाई करने से परहेज नहीं करते। यह चर्चा पूरे विकास भवन में आम है।
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