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91 भगोड़ों ने बढ़ाई पुलिस की टेंशन

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91 भगोड़ों ने बढ़ाई पुलिस की टेंशन
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भागने वालों में सबसे ज्यादा बिहार और कानपुर के रहने वाले
निषेधाज्ञा उल्लंघन का सभी पर दर्ज है मुकदमा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लॉकडाउन का उल्लंघन और क्वारंटीन होने के बावजूद फरार हुए 91 भगोड़ों ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। क्वारंटीन होने के बावजूद अस्पताल से चकमा देकर सभी फरार हो गए हैं। एसपी हेमराज मीणा कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद सभी की गहन खोजबीन होगी। इनमें बिहार और कानपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
एसपी के अनुसार शनिवार तक लॉकडाउन के उल्लंघन व क्वारंटीन सेंटर से भागने के मामले में कुल 82 मुकदमे दर्ज किए गए। जिनमें 268 व्यक्ति नामजद हैं। इनमें 177 तो गिरफ्तार किए गए लेकिन 91 चकमा देकर भाग निकले। कोरोना संक्रमण का कहर बढ़ने के बीच लॉकडाउन का लगातार पालन कराया जा रहा है। इसके लिए महामारी एक्ट और निषेधाज्ञा लागू की गई। मगर कुछ तत्व लाख जागरूक करने के बावजूद लॉकडाउन का उल्लंघन करते देखे जा रहे हैं। शुरुआत में पुलिस ने कानूनी कार्रवाई के बजाए उन्हें चेतावनी देकर एक मौका दिया। बावजूद इसके तमाम लोग मनमानी करने से बाज नहीं आए। तब पुलिस को सख्त कदम उठाना शुरू किया। सीआरपीसी और आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।
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धारा 188 के तहत मिलेगी सजा
लॉकडाउन के दौरान अगर आप बिना किसी वजह सिर्फ तफरी के लिए घर से बाहर निकलते हैं तो धारा 188 के तहत आपको एक महीने की जेल हो सकती है। इस धारा के तहत जुर्माना और जेल दोनों की सजा हो सकती है। जुर्माने की राशि 200 रुपये तक हो सकती है।
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क्या है धारा 144
किसी भी जगह पर हालात बिगड़ने की संभावना को देखते हुए इसे लागू किया जाता है।
इसके लागू होने के बाद सड़क पर चार से ज्यादा लोग एक साथ खड़े नहीं हो सकते।
अगर कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करता है तो पुलिस उसे धारा 107 या धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर सकती है। इसके साथ ही उसे एक साल तक की कैद की सजा दी जा सकती है। इस अपराध में जमानत हो सकती है।
लॉकडाउन से जुड़े नियम
अगर आप लॉकडाउन के दौरान लाभ पाने के लिए झूठ बोलते हैं या झूठा बहाना बनाते हैं तब भी आपको दो साल की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
लॉकडाउन में जरूरी सामान के अवैध भंडारण की स्थिति में भी जेल हो सकती है।
अगर लॉकडाउन की अवधि में कोई जिम्मेदार अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
झूठी खबर या अफवाह फैलाने के मामले में भी एक साल जेल हो सकती है।
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