सस्ती गाड़ी खरीदकर मोटर मालिक की दुश्वारिया बढ़ गई हैं। ऑफर देकर एजेंसियों ने 31 मार्च तक बीएस 3 मानक के वाहन शोरूम से बेच दिए। 31 मार्च आधी रात रजिस्ट्रेशन बंद हो गया। तय अवधि में रजिस्ट्रेशन न करा पाने वाले जिले के 856 वाहनों के मालिक अब परेशान हैं ये शोरूम के मालिकों पर अपना गुस्सा उतार रहे हैं।
आरटीओ दफ्तर में 31 मार्च तक 1195 वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन हुआ। इसमें दो पाहिया 1090 व चार पाहिया 105 वाहन शामिल हैं। जबकि 90 चार पाहिया व 766 दो पाहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन निर्धारित समय में नहीं हो सका। सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-3 मानक के वाहनों पर 31 मार्च के बाद रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी। जिससे वाहन निर्माता कपंनियों के हाथ पाव फूल गए। आन फानन में गाड़ियों के दाम घटा दिए। शोरूम में हर गाड़ी पर छूट की कीमत आठ हजार से 20 हजार तक थी। बाइक के अलावा आटो, जीप, कार के शोरूम पर भीड़ लग गई। अखबारों और न्यूज चैनलों से जानकारी होते ही लोग जुगाड़ लगा कर छूट के वाहन लेने लगे। जिले में 29 मार्च को नो स्टॉक का बोर्ड लग गया। अंतिम समय तक लोग छूट का लाभ लेना चाह रहे थे।
आरटीओ आफिस में रात 12 बजे तक कर्मचारियों ने काम किया। 31 मार्च बीतने के बाद रजिस्ट्रेशन बंद हो गया। छूट की लूट में शामिल लोग अब रजिस्ट्रेशन न होने से परेशान हैं। एजेंसी मालिक आरटीओ पर जान बूझकर वाहनों का रजिस्ट्रेशन न करने का आरोप लगा रहे हैं। एजेंसी मालिकों का कहना था कि वाहन के कागजात रकम सहित संभागीय परिवहन कार्यालय में भेज दिया गया था। लेकिन सुविधा शुल्क न देने के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। अब ग्राहक उन्हें परेशान कर रहे हैं।
इस मामले में आरटीओ का कहना है कि 31 मार्च तक बिके वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया गया। जिन वाहनों का पंजीकरण तय समय में नहीं हो सका था उनको अनुमोदन के लिए विभाग को भेजा गया है। वहां से सहमति मिलने पर ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।