भू-राजस्व का सर्वे होगा धान खरीद का आधार
ऑनलाइन प्रदर्शित होगा रकबा, भरना होगा धान बुआई का क्षेत्रफल
बिचौलियों पर शिकंजा, एसडीएम, तहसीलदार करेंगे सत्यापन
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना के तहत बिचौलियों पर सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। धान खरीद की तिथि तय कर दी गई है। खरीद एक नवंबर से शुरू होनी है। इस बार धान खरीद के लिए किसानों को भागदौड़ करने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें कितना धान बेचना है, इसे भी कहीं बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भू राजस्व का सर्वे धान खरीद का आधार बना दिया गया है। पंजीयन कराते समय किसान को उसका रकबा ऑनलाइन दिखने लगेगा। बस उसमें केवल धान की बुआई का क्षेत्रफल किसान को भरना पड़ेगा। उस पर भी इसका सत्यापन एसडीएम अथवा संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार ऑनलाइन करेंगे।
धान खरीद में बिचौलिए दूर रहें, इसकी व्यवस्था सरकार ने कर दी है, क्योंकि अब धान खरीद में किसानों को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है। 1750 रुपये क्विंटल की दर से धान बेचने के लिए किसान को बस 31 अगस्त तक अपना पंजीकरण किसी भी साइबर में जाकर कराना होगा। यहां किसान को अपना आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण तथा खतौनी की खाता संख्या पंजीकरण प्रपत्र में भरनी होगी। खतौनी के खाता संख्या के आधार पर राजस्व विभाग के पोर्टल पर भूलेख के माध्यम से भूमि का रकबा प्रदर्शित हो जाएगा। इसी में किसान को अपनी हिस्सेदारी एवं बोए गए धान के रकबे को फीड करना होगा। किसान की घोषणा के आधार पर भूमि के रकबे का ऑनलाइन सत्यापन खाद्य विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए लागिंग के माध्यम से किया जाएगा। सत्यापन के पश्चात जिले की उत्पादकता व फसल के रकबे के आधार पर अधिकतम बेची जाने वाली मात्रा का आंकलन पंजीयन माड्यूल के माध्यम से प्रपत्र पर अंकित हो जाएगा। किसान प्रपत्र में अंकित मात्रा से अधिक धान नहीं बेच सकेगा। सत्यापन के बाद संबंधित किसान को पंजीकरण का प्रिंट आउट मिलेगा। क्रय केंद्र पर धान बेचते समय किसान पंजीकरण प्रमाणपत्र के साथ बैंक खाता का पासबुक व आधारकार्ड मूल रूप से केंद्र प्रभारी के समक्ष अंकित विवरण से मिलान के लिए प्रस्तुत करेंगे। तत्पश्चात धान की खरीद की जा सकेगी।
जिला विपणन अधिकारी गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि सरकार की नीति इस बार पूरी तरह साफ है कि बिचौलियों को खरीद से दूर कर दिया जाए। बिचौलियों के चलते तमाम किसानों को धान बेचने में पसीना छूट जाता था। अब इस व्यवस्था से वाजिब किसान ही धान बेच पाएंगे।