बस्ती। झुलसा देने वाली चिलचिलाती दोपहर की बुधवार को जिस वक्ता पारा 40 डिग्री सेल्सियस पार कर रहा था उसी वक्त शहर की सड़कें जाम से जूझ रही थीं। अस्पताल चौराहे पर दक्षिण दरवाजे की तरफ, नेहरू तिराहे पर शिवाय पैलेस तक और कटरा में चुंगी मोड़, पानी टंकी और संत गाडगे प्रतिमा के पास वाहन रंगते रहे। जाम में फंसे लोग धूप और गर्मी से बेहाल दिखे। कई स्कूल वाहन में नन्हें बच्चे भूूख-प्यास से निढाल दिखे। इतने के बावजूद कहीं भी यातायात पुलिस सक्रिय नजर नहीं आई। जिसे लेकर लोग व्यवस्था को कोसते रहे।
28 लाख आबादी पर 35 हजार से अधिक मोटर-गाड़ी लोगों के पास है। ट्रैफिक कंजम्प्सन के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार इनमें से सिर्फ 35 या 40 फीसदी गाड़ियां ही जिला मुख्यालय तक आती-जाती हैं। इस पर भी जाम की स्थिति अगर बदतर है, तो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। शहर में यह नई समस्या नहीं है। 2010 में जब शहर की आबादी 22 लाख थी और रोड पर चलने वाले वाहनों की संख्या 20 फीसदी कम थी। मगर तब गांधीनगर, रोडवेज, मंगल बाजार, पांडेय बाजार की सड़कें सकरी थीं। मुख्य बाजार पक्के की दोनों पटरियां अतिक्रमण और अवैध कब्जे से कराह रही थीं और चौराहों पर सिगनल भी नहीं लगे थे। अब पटरियां भी चौड़ी हो गई हैं और अतिक्रमण भी पहले से कम हुआ। लेकिन जाम की समस्या बढ़ती गई।