घटती सरयू नदी से कटान हुई और तेज
खतरे के निशान से 50 सेेंटीमीटर ऊपर बह रही है नदी
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। माझा क्षेत्र में बसे लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले एक महीने से लगातार सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चल रहा है। घटती सरयू नदी से कटान भी बढ़ गई है।
नदी का प्रकोप देखकर नदी के आसपास के ग्रामीण सहमे हुए हैं। पिछले तीन सप्ताह से डूबी फसलों के बर्बाद होने का डर सताने लगा है। बुधवार को सरयू नदी का जलस्तर 93.230 मीटर था जबकि बृहस्पतिवार को तीन सेंटीमीटर घटकर 93.200 मीटर पर पहुंच गया। नदी अभी भी खतरे के निशान से 92.730 से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। विक्रमजोत ब्लॉक के बांधविहीन क्षेत्रों में खेत खलिहान व रास्तों पर बाढ़ का पानी भरा है। जलस्तर कम होने से कटान प्रभावित गांवों केशवपुर, बाघानाला, भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव, चानपुर, सहजौरा और संदलपुर छतौना में नदी की तेज कटान शुरू हो गई है। नदी लगातार खेती योग्य भूमि काट कर आबादी से सट रही है। इससे आधा दर्जन गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को हुई कटान में केशवपुर में नदी के किनारे का लगभग चार मीटर चौड़ा और 50 मीटर लंबा हिस्सा नदी में समा गया। बाघानाला में नदी नव निर्मित अंत्येष्टि स्थल की तरफ बढ़ रही है। भरथापुर गांव को हाईवे से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग कटकर नदी में समा रहा है। नदी घरों से सटकर बह रही है। मंगलवार को देखते-देखते शीशम का पेड़ नदी में समा गया था। कल्यानपुर में पूर्वी किनारे पर कटान बरकरार है। पड़ाव में सेना की जमीन लगभग नदी में समा चुकी है। सहजौरा पाठक गांव के अस्तित्व पर संकट बढ़ गया है। लगातार आबादी की भूमि कट रही है। आधे गांव की आबादी की भूमि नदी में समा चुकी है। कटान से ग्रामीण रात-दिन दहशत में जी रहे हैं। प्रशासन मौन है। भरथापुर के ननकू सिंह, जगलाल, भरथलाल का कहना है कि कटान की सूचना रोज बाढ़ खंड के कर्मचारियों को दी जाती लेकिन कोई दिखाई ही नहीं देता।