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बाढ़ गई तो गायब दिखी पुलिया और सड़क

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बाढ़ गई तो गायब दिखी पुलिया और सड़क
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विक्रमजोत/छावनी।
घाघरा नदी में उतराव और चढ़ाव जारी है। तीन दिन घटने के बाद मंगलवार को जलस्तर में दो सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के मुताबिक मंगलवार को घाघरा का जल स्तर 93.27 सेमी रहा जो खतरे के निशान 92.73 से 54 सेमी ऊपर है।
घाघरा में बाढ़ लौटने के बाद आफतों का दौर जारी है। छावनी स्थित वीडी बांध का ठोकर नं. 10 जहां घाघरा की धारा से कट गया वहीं विक्रमजोत के लोलपुर-विक्रमजोत बांध से सटे खेमराजपुर की सड़क और पुलिया बही मिली। छावनी प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा का जल स्तर घटने के बाद अब कटान तेज हो गई है। मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे वीडी बांध का अतिसंवेदनशील एंव काफी महत्वपूर्ण ठोकर दस नंबर का लगभग 15 मीटर भाग नदी में समाहित हो गया। गनीमत कि ठोकर पूरब दिशा से नदी में समाया अगर यही स्थिति पश्चिम दिशा से होती तो नदी के तेज बहाव के दबाव से ठोकर पूरा बह जाता। इस ठोकर के बचाव में अभी तक विभाग की तरफ कोई बचाव कार्य शुरू नहीं कराया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ठोकर नंबर दस का वजूद मिटा तो आगे बलुआ गांव के पास बीडी बांध पर खतरा मडराने लगेगा। यहां अगर बांध टूटा बलुआ, अकला, माझिलगांव, सूबेदारपुरवा आदि गांवों का अस्तित्व ही मिट जाएगी।
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खेमराजपुर की एक मात्र सड़क पुलिया समेत बही
विक्रमजोत धुसवां बांध से सटकर बसे खेमराजपुर गांव और बांध को जोड़ने वाला एक मात्र इंटरलाकिगं मुख्यमार्ग पुलिया सहित बाढ़ के तेज पानी में बह गया। जब चार दिन बाद बाढ़ का पानी घटा तब पता चला कि सड़क पुलिया नाममात्र की रह गई है। इसी रास्ते से गांव वाले विक्रमजोत, बस्ती, फैजाबाद आते-जाते हैं। जिससे गांव में बाइक भी नहीं आ जा सकती सिर्फ पैदल किसी तरह घुटने भर पानी में घुसकर लोग आ जा रहे हैं। गांव वालों ने प्रधान से पुन: रास्ता बनवाने कि मांग की है। ग्रामप्रधान रामपाल सिंह ने कहा कि बजट ही नहीं है। गांव के 125 घर की आवाजाही इसी रास्ते से है जो एक हफ्ते से बन्द है । अब खेमराजपुर के विजयवन्त सिंह, उदयभान सिह, विवेक तिवारी, गुड्डू सिह विकास, हरिकेश सिह, लाल जी सहित सैकड़ों ने जिलाधिकारी और विधायक और सांसद को पत्र लिखकर पुलिया और अप्रोच बनवाने की मांग की है।
फिर बढे़गी घाघरा
एल्गिन बैराज पर जलस्तर बढ़ने की सूचना है जो 107.65 मीटर पर पहुंच गया है। सहायक अभियंता दयाशंकर सिह ने बताया कि शारदा, सरयू व बनवसा बैराजों से 1,57,090 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है, जिससे नदी फिर बढे़गी। यह बढ़त दो-तीन दिन रह सकती है।
स्पर मरम्मत कार्य में लगे मजदूर
लोलपुर-विक्रमजोत बांध के भदोई ठोकर व नम्बर दो कि हालत चिन्ताजनक बनी हुई है। क्योंकि घटती नदी का तेज प्रवाह सीधे इन्हीं दो ठोकरों से टकरा रही है। रविवार को स्पर के नोज धंस गए थे। इसका मरम्मत कार्य मंगलवार तक चल रहा है। बाढ़ प्रखंड के अधिकारी निगरानी कर रहे हैं। नदी में उफान से माझा में रहने वाले छुट्टा जानवर फोरलेन के पारकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं।
लंच पैकेट अब बंद
बाढ़ के पानी से घिरे कल्याणपुर सहजौरा और भरथापुर के घरों से पानी हट चुका है। मगर कचरे और फसलों कि सड़ांध से ग्रामीण अभी भी गांव के बाहर हैं। सरकारी लंच पैकेट के भरोसे रहने वाले बाढ़ पीड़ितों के लिए मंगलवार को सरकारी भोजन आपूर्ति बंद कर दी गई। छोटेलाल, छत्तर, एकादशी, हरी, बाबूलाल यादव ने बताया कि शाम से ही भोजन नहीं दिया गया।
लंच की जगह बाढ़ पीड़ितों को मिला लाई

हरिशंकर तिवारी
दुबौलिया। हर्रैया तहसील में बाढ़ पीड़ितों को राहत के नाम पर प्रशासन ने लाई बांट कर इतिश्री कर ली। जबकि प्रदेश सरकार का दावा है कि बाढ़ के मद में रकम की कमी नहीं है।
उमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन की नींद खुली। सूविखा बाबू गांव में लाई, माचिस व मोमबत्ती 55 परिवारों में बांटा गया। इन पीड़ित परिवारों का एक दिन भी लंच पैकेट नहीं दिया गया। पीड़ित लोगों ने बच्चों के साथ बाढ़ के दिनों में मुश्किल से गुजरा किया। जबकि ढेड़वा के 24 घर, विशुनदासपुर व खंजाची पुरवा के लोगों को राहत के नाम पर कुछ नहीं मिल पाया है। यहां के लोग बंधे पर शरण लिए हुए थे। बिजली विभाग ने बाढ़ के पानी को देखते हुए बिजली काट दी थी। तब से गांव वाले अंधेरे में रह रहे थे। नदी की धारा गांव के पास होकर बह रही है। दोनों पुरवे को एक सोती के माध्यम से विभाजित है। प्रशासन की तरफ मोमबत्ती दी गई। पहले मिटटी का तेल मिलता था। जो कुछ दिन चलता था। लाई, माचिस और मोमवत्ती को बांटने राजस्व कर्मियों के साथ विधायक, एसडीएम पहुंच गए। गांव वालों ने सोचा कि फौरी राहत मिल जाएगी। जब बोरा खोलकर बांटना शुरु हुआ तो भौचक रह गए। इतना बड़ा परिवार में इससे कैसे काम चलेगा। जब कि 12 दिनों से हम लोग वीडी बांध से ढ़ाई किमी. अंदर पानी में रहने को मजबूर हैं। मगर प्रशासन की लाचारी अपनी है उन्हें बाढ़ मैन्यूल के मुताबिक ही कार्य करना है। पानी की कम होने के बावजूद लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। बच्चों ने बताया कि पानी ज्यादा होने के बावजूद नाव के सहारे पढ़ाई जारी रखा है। उन्हें पानी का डर नहीं लगा।
क्या कहते बाढ़ पीड़ित
राम अभिलाख ने बताया कि 15 दिनों से अधिक समय से हम लोगों के गांव के चारों तरफ पानी पहुंच गया था। मगर कोई हम लोगों की सुध लेने नहीं आया। तीन नावों से 45 बच्चे पढ़ने जाते हैं। सरकारी नाव नहीं लगाई गई है।
कुसलवता ने बताया कि गांव में बाढ़ के आने के बाद नाव से हम लोग बाजार से सामान खरीद कर लाना पड़ा। फसल खराब हो गई। बच्चों की पढ़ाई व राशन की व्यवस्था मुश्किल से हो पाई। जो राहत सामग्री मिल रही है, बेकार है।
राधेश्याम ने बताया कि प्रशासन ने राहत के नाम पर लाई, माचिस व मोमबत्ती दिया है। जबकि हम लोगों को घर के सामान खरीदने के लिए रकम की आवश्यकता थी। बच्चों को बुखार और चर्म रोग की दवा की आवश्यकता है।
भानमती ने बताया कि गांव हर वर्ष बाढ़ से काफी नुकसान होता है। सरकार मदद के नाम पर राहत सामग्री बांट देता है। गांव वालों को आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। प्रशासन की लापरवाही के चलते हम लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
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पानी में कमी कटान तेज

दुबौलिया। पिछले दो दिनों में घाघरा नदी के जलस्तर में कमी देखी गई है। मगर जलस्तर कमी होते ही नदी धारा बदलकर अलग, अलग जगहों पर कटान करना शुरू कर दिया है। जिससे वीडी बांध पर खतरा बना हुआ है। सोमवार को चांदपुर के पास कटान शुरु हुआ था। मंगलवार को धरमूपुर मुस्तहकम के पास कटान शुरु हो गया। वहां पर बांस व बल्ली के सहारे बेस बनाया जा रहा था। वहीं चांदपुर और पारा के पास बने स्परों पर दबाव बना हुआ है। नदी कटरिया, चांदपुर एवं पारा सैफाबाद वीडी बांध के करीब धारा प्रवाहित हो रही है। विभाग के ठेकेदार पर बंधे की सुरक्षा में लापरवाही के लोकर गांव वालों में गुस्सा है। कि समय रहते बंधे पर पर्याप्त बोल्डर व ईट नहीं गिराए जा रहे है। विभाग के एसडीओ जीतेन्द्र कुमार, जेई बंधे पर कार्य चल रहा है। मगर रात में कटान शुरु होने पर खतरा बना हुआ है।
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