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कृ ठंड से इस बार आम का कम पैदावार :संयुक्त निदेशक

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कम ठंड से आम की पैदावार पर असर
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संयुक्त निदेशक ने बताया कि भुनगा, मिज कीट और खर्रा रोग के लिए करें छिड़काव
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। ठंड कम पड़ने से यह वर्ष आम के लिए ऑफ सीजन हो गया है। लेकिन जो बौर आए हैं उन्हें भुनगा, मिज कीट और खर्रा रोग से बचाने के लिए छिड़काव जरूरी है। यह कहना है संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ आरके तोमर का।
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डॉ. तोमर ने बताया कि बौर से लेकर फल आने तक का समय आम के लिए खासा संवेदनशील होता है। इस समय भुनगा, मिज कीट और खर्रा रोग की रोकथाम कर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। संयुक्त निदेशक ने सोमवार को विशेष बातचीत में बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आम की पैदावार कम होगी। इसका प्रमुख कारण यह है कि बौर निकलने के लिए आठ माह का समय चाहिए। जबकि इस वर्ष ठंड कम पड़ने से समय पर बौर निकलने के लिए पेड़ों को जो चाहिए था वह नहीं मिल पाया। जिन पेड़ों में बौर लगे हैं उनमें भुनगा कीट का प्रकोप बढ़ा है। यह कीट प्रकोप वाले हिस्से पर शहद जैसा चिपचिपा पदार्थ छोड़ते हैं। इसकी वजह से काले रंग की फफूंद जमा हो जाती है। निजात पाने के लिए की क्यूनालफास 25 ईसी दो मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। मिज कीट की मादा अंडे सूड़ी में बनकर फलों और कोपलों को अंदर-अंदर ही खाकर क्षति पहुंचाते हैं। जबकि खर्रा रोग के प्रकोप की दशा में प्रभावित फल और डंठल सफेद चूर्ण जैसी फफूंद दिखाई देते हैं। प्रभावित हिस्सा पीला दिखने लगता है। इन रोगों से बचाव के लिए तीन मिलीलीटर निंबीसिडीन प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। इसके साथ ही कैलेक्सीन तीन मिली एक लीटर पानी के घोल में डालकर छिड़काव किया जा सकता है। दूसरा छिड़काव काबोरिल 0.2 या क्वीनालफास 1.3 मिली और इंडोफिल एम-45/दो ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव किया जा सकता है।
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