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संविधान नहीं महिलाओं के प्रति बदलनी होगी सोच: कल्पना

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महिलाओं के प्रति बदलनी होगी सोच: कल्पना
- भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी ने अपराजिता पोस्टर लांच किया
- दुष्कर्म की घटनाओं पर जताई चिंता, कहा भाषण नहीं प्रयास जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी ने कहा कि महिलाओं व बच्चियों के साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाओं के लिए संविधान में संशोधन की नहीं बल्कि समाज को सोच बदलने की जरूरत है। इसके लिए भाषण के बजाय सभी को मिलकर प्रयास करना होगा, तभी भारत की गौरवशाली परंपराएं बरकरार रहेंगी। इस दिशा में अमर उजाला की मुहिम अपराजिता विशेष सराहनीय है।
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मूल रूप से असम की रहने वाली कल्पना पटवारी सोमवार रात बस्ती महोत्सव में आयोजित कार्यक्रम के बाद अमर उजाला से बातचीत कर रही थीं। इससे पहले उन्होंने अमर उजाला के महिला सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे कार्यक्रम अपराजिता के पोस्टर को भी लांच किया। कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर अमर उजाला का यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा। समाज को बदलने में जितनी भूमिका पुरुष निभाए उतनी ही भागीदारी महिलाओं को भी निभानी होगी। बस्ती के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उनको साउथ अफ्रीका में कार्यक्रम के दौरान एक मित्र ने बस्ती के बारे में बताया था कि उनके पुरखे यहीं रहते थे और यहां की तमाम खूबियां बताई तभी से महर्षि वशिष्ठ की माटी को माथे से लगाने का मन था। महोत्सव में डीएम डॉ. राजशेखर के माध्यम से यहां की धरती पर आने मौका मिला। इसके लिए जिला प्रशासन का उन्होंने शुक्रिया अदा किया। कहा कि उनकी भाषा भोजपुरी तो नहीं है, मगर उनका दिल यहां की संस्कृति में रचा बसा है। ऐसे में पूर्वांचल को कर्म भूमि बना लिया। उन्होंने सदन में भी महिलाओं की भागीदारी पचास प्रतिशत किए जाने को कहा।
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