मंजर याद कर आज भी सिहर उठते है ग्रामीण
कोलकाता से आए कारसेवकों की पुलिस को मिली थी भनक
पुलिस की गोली से दो की हो गई थी मौत, कई हो गए थे घायल
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। थाना क्षेत्र के सांड़पुर गांव में 22 अक्तूबर 1990 का मंजर आज भी उनकी नजरों के सामने है। भोर में कोलकाता से आए कारसेवकों की भनक लगने के बाद पुलिस ने गांव को घेर लिया और कई ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया। इसकी जानकारी होते ही पूरा गांव जुट गया। पुलिस व ग्रामीणों के बीच संघर्ष हुआ तो पुलिस ने पहले हवाई फायरिंग फिर सीधी कार्रवाई कर दी। इस घटना में दो ग्रामीणों की मौत हुई और कई घायल हो गए।
विश्व हिन्दू परिषद के आह्वान पर अयोध्या चलो कार्यक्रम के अन्तर्गत कोलकाता से आए कुछ कारसेवकों के लिए ग्रामीण भोजन का प्रबंध कर रहे थे। तभी तत्कालीन थानाध्यक्ष रामचंद्र राय को सूचना मिली कि थाना क्षेत्र के सांड़पुर गांव में छपिया मलिक, बरदिया कुंवर में कारसेवक पहुंच गए हैं। उनकी आवभगत व सरयू नदी से नाव से अयोध्या पहुंचाने की तैयारी ग्रामीण कर रहे हैं। सूचना के तत्कालीन थानाध्यक्ष रामचंद्र राय दलबल के साथ वहां पहुंचकर सांड़पुर के दधिबल सिंह, नरेंद्र बहादुर, रामकरन व राघवेंद्र को हिरासत में लेकर थाने की ओर चलने लगे। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई और हिरासत में लिए गए ग्रामीणों को भीड़ छुड़ाने का प्रयास करने लगी। इसी को लेकर ग्रामीणों व पुलिस के बीच झड़प होने लगी, ग्रामीण पुलिस वालों को डाकू समझकर शोर मचाने लगे। ग्रामीणों को उग्र देखकर पुलिस ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की गोली सांड़पुर निवासी सत्यवान सिंह, महेन्द्र पाल, इन्द्रजीत व टेढ़वा हेंगापुर गांव निवासी रामचंद्र यादव, जयराज यादव को लग गई। गोली लगने से सांड़पुर के सत्यवान सिंह व टेढ़वा हेंगापुर के रामचंद्र यादव की मौत हो गई। इसके बाद पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस के गोलीकांड में घायल जीवित महेन्द्र पाल सिंह, जयराज यादव घटना को याद कर आज भी सिहर जाते हैं। 75 वर्षीय महेन्द्र पाल ने कहा कि 22 अक्तूबर 1990 की वह सुबह कभी नहीं भूलेगी। पुलिस ने निहत्थे व निरीह ग्रामीणों पर सिर्फ कारसेवकों की सेवा के नाम पर जमकर बर्बरता की। गांव के दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना में मेरे दाहिने हाथ की कुहनी पर गोली लगी थी। आज भी इसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। जिस राम मंदिर पर पूरा देश मर मिटा सरकार को चाहिए कि उसे जल्द से जल्द बनवाए। गोलीकांड में घायल जयराज यादव घटना को याद करते हुए बताते हैं कि पुलिस की गोली दाहिने आंख के बगल लगी थी। महीनों तक अस्पताल में जिन्दगी और मौत से संघर्ष करते हुए बच गया। अब सरकार से यही उम्मीद है कि जीवित रहते हुए भगवान राम का मंदिर अपनी आंखों से देख लूं। गोली कांड में मौत की नींद सो गए सत्यवान के भाई सत्य प्रकाश सिंह कहते हैं कि राम के नाम पर भाई की कुर्बानी के बाद सरकार ने मुआवजा तो दिया, मगर उस मामले में तारीख दर तारीख आज भी दिल में टीस देता है। अब राम मंदिर निर्माण ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बरदिया कुंवर के सुरेंद्र सिंह, सांड़पुर के अनिल सिंह, रामकरन सिंह, इन्द्रजीत उस घटना को सोच कर सिहर जाते हैं। कहते हैं कि गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा गया था। पुलिस की बर्बरता केवल कारसेवकों को भोजन देने के कारण की गई।