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बाजार में ईको फ्रेंडली पटाखों की भरमार

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आतिशबाजी - फोटो : amar ujala
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बस्ती। ईको-फ्रेंडली दीपावली की इस बार गांवों और कस्बों तक धमक सुनाई पड़ने लगी है। नफा-नुकसान और महंगाई से आम आवाम के नजरिये में बदलाव देखने को मिल रहा है। पॉश कालोनियों के बाद गांव-देहात और छोटे कस्बों में भी पर्यावरण को लेकर संजीदगी बढ़ी है।
इस बार लोग खुद महंगे पटाखों के बजाय परंपरागत दियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस बार पहले से ज्यादा लोग सजग हैं। टनों में पटाखों के जलाने से हवा जहरीली हो जाती है और सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है यह अब बताने की ज्यादा जरूरत नहीं है।
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बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के चलते साइंस एंड टेक्नॉलजी डिपार्टमेंट, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों से मिलकर पता लगाता रहा कि किस तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल करके पल्यूशन फ्री पटाखे बनाए जा सकते हैं, जिसके फलस्वरूप यह ईको-फ्रेंडली पटाखे बाजार में उतारे गए हैं।
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बाजार में मौजूद वैरायटी
इस बार पटाखा बाजार में ईको फ्रेंडली पटाखों की काफी वैरायटी आई है। ईको फ्रेंडली रॉकेट से लेकर अनार, फुलझड़ी, स्काई शॉट्स समेत बच्चों के लिए खास ईको फ्रेंडली दिवाली पटाखा पैक्स के ऑप्शन भी मौजूद हैं। ईको फ्रेंडली पटाखों की खास बात यह है कि सामान्य पटाखों की तुलना में यह आवाज और प्रदूषण कम करते हैं। पटाखा बाजार के व्यापारियों के मुताबिक, इस बार सामान्य पटाखों की तुलना में ईको फ्रेंडली खरीद रहे हैं। इन पटाखों के जलाने से धुंआ भी कम निकलेगा और आवाज भी कम ही होती है।
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