मुआवजे की आस में दर-दर भटक रहा परिवार
नाव डूबने से चार किसानों की हो गई थी मौत
प्रशासन ने शव मिलने पर ही मुआवजा की बात कही
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। ब्लॉक क्षेत्र के पारा गांव के निकट 28 दिसंबर को नाव दुर्घटना में मारे गए चार किसानों में से तीन का परिवार आज तक मुआवजा का इंतजार कर रहा है। मुआवजा की आस में परिवार के लोग अधिकारियों के दरवाजे तक गुहार लगा चुके हैं, मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि जब तक शव नहीं मिलेेगा तब तक मुआवजा देना संभव नहीं है।
गांव के निकट 28 दिसंबर को घाघरा की धारा में किसानों से भरी नाव डूब गई थी। इसमें किसान सुरजीत, छोटे लाल निवासी पिपरी व मायाराम, बीहड़ निवासी पारा घाघरा की धारा में बह गए थे। जिसमें नौवें दिन पारा निवासी बीहड़ का शव मिल गया था लेकिन आज भी तीन किसानों के शव नहीं मिले। परिवार के लोगों ने शव मिलने की आस छोड़ दी और उनका कर्मकांड कर दिया। घटना के तीसरे दिन पारा तटबंध पर किसान परिवार आंदोलन करने बैठ गया। मौके पर पहुंचे तत्कालीन डीएम अरविंद कुमार सिंह व एसडीएम दिनेश ने इनको आश्वस्त किया कि वे शव की तलाश तो करवाएंगे ही साथ ही मुआवजा भी दिया जाएगा। इसके बाद जब बीहड़ का शव मिल गया तो उसके परिवार के लोगों को आर्थिक सहायता दे दी गई, मगर आज भी उन तीन किसानों को सहायता के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है। नदी की धारा में गायब हुए मायाराम के बेटे सन्नी व पत्नी रेनू ने कहा गायब हुए साढे़ छह माह बीत गए हम लोगों ने क्रिया-कर्म भी कर दिया। परिवार के कमाऊ सदस्य होने के नाते मौत के बाद परिवार मुफलिसी में है। घर गृहस्थी भगवान भरोसे चल रही है। तब तो तमाम आश्वासन दिया गया था, मगर अब कोई सुनने को तैयार नहीं है। सुरजीत के पिता भारत ने कहा कि घटना के समय जिले के सभी अधिकारी पहुंचे थे। सहायता दिलाने की बात कही थी। एसडीएम हर्रैया शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि मामला संज्ञान में है, मगर जब तक शव न मिल जाए तब तक मुआवजा नहीं दिया जा सकता है।