जान लेवा बीमारियों से बचाने के लिए जिले में एक लाख 11 हजार पशुओं को टीका लगाया जाएगा। यह लक्ष्य 30 जून तक पूरा कर लेना है। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से 15 मई से टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। 32 पशु अस्पतालों के माध्यम से मई में 41 हजार पशुओं को टीकाकरण हो चुका है। जिसमें गलाघोंटू 30 हजार व पीपीआर के 11 हजार टीके भेड़, बकरी, व छोटे जानवरों को लगाए गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहले अभियान चलाना है। जिससे पशु पालकों को नुकसान न हो। साथ ही टीम पशु पालकों को बीमारी के बारे में जागरूक कर रही है।
घाघरा नदी के बाढ़ प्रभावित कलवारी, कुदरहा, ललहवा चिलमा, विशेषरगंज, विक्रमजोत व बभनगंवा पशु अस्तपाल पर तैनात पशु चिकित्साधिकारी व फार्मासिस्ट की टीम ने वीडी बंधे के अंदर आने वाले गांव में गलाघोटू 18 हजार व पीपीआर के चार हजार टीके लगाए जा चुके हैं। बाढ़ प्रभावित टकटकवा, अशोकपुर, कटरिया, किशुनपुर, उंजी, कनघुसरा, उमरिया, गौरिया नयन, पिपरपाती सहित अन्य सैकड़ो गांव वीडी बंधे के अंदर है। जहां पर प्रति वर्ष घाघरा की बाढ़ से पशु पालकों को नुकसान उठाना पड़ता है। माझा क्षेत्र के पशु पालक भैंस व गाय रखते है। कस्बों व शहरों में दूध बेचकर परिवार चलाते है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीसी द्विवेदी ने बताया कि शासन के लक्ष्य के मुताबिक पशुओं को टीकाकरण किया जा रहा है। 30 जून तक एक लाख से अधिक पशुओं को टीकाकरण होना है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में छह पशु अस्पतालों की टीमे लगाई गई है।