बस्ती। जिला योजना समिति की बैठक में भाग लेने आए प्रभारी मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच बहस बाजी से दो चार होना पड़ा। उन्हें कहना पड़ा कि जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच संवाद का अभाव है, और यह जब तक समाप्त नहीं होगा विकास नहीं होगा। उन्होंने अफसरों और जनप्रतिनिधियों दोनों को नशीहत देते हुए कहा कि ताली दोनों हाथ से बजनी चाहिए।
वैसे तो इस बैठक में कभी जनप्रतिनिधि आपस में तो कभी जनप्रतिनिधि और अफसरों के बीच नोकझोंक हुई। मगर मामला उस समय गरमा गया जब कप्तानगंज के भाजपा विधायक सीपी शुक्ल ने ब्लॉकों को मनरेगा से कार्य कराने के लिए धन उपलब्ध न कराने की बात कही। कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष किसी ब्लॉक में 12 तो किसी में 15 फीसदी मानवदिवस सृजित हुए। कहा कि इससे जहां मनरेगा मजदूरों को कार्य नहीं मिला वहीं कई विकास कार्य नहीं हो पाए। जबकि क्षेत्र पंचायतों से मनरेगा के तहत कार्य कराए जाने का प्राविधान भी है। विधायक का कहना है कि इस सवाल के जवाब में सीडीओ ने कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार अधिक होने के कारण धन नहीं दिया गया। इस पर विधायक ने कहा कि भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी अफसरों की है, क्यों इसके लिए मजदूर परेशान हो और विकास कार्य बाधित हो। मामला गरम होते देख सीडीओ ने कहा कि पहले वह इसकी जांच कराएंगी, उसके बाद क्षेत्र पंचायतों को मनरेगा से कार्य कराया जाएगा। मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ, विधायक ने सीडीओ से कहा कि कब तक जांच कराएगी और कब धन रिलीज होगा, इस पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद प्रभारी मंत्री को दखल देना पड़ा और उन्होंने सीडीओ से कहा निर्धारित समय पर जांच कराकर नियमानुसार क्षेत्र पंचायतों को मनरेगा से कार्य कराने के लिए धन जारी किया। विधायक ने कहा कि पूरे जिले में विकास के नाम पर क्षेत्र पंचायतों में सरकारी धन की लूट मची हुई है। कहा कि गौर ब्लॉक में बंधे के नाम धन आया मगर सड़क बनवा दिया गया। बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले सभी ब्लॉकों में कराए कार्यों की जांच कराने जा रहे हैं।