विक्रमजोत के 17 गांवों के लोग झेल रहे बाढ़ की दुश्वारियां
एक महीने से गांव में घुसा है पानी, भोजन से दवा तक परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। सरयू के जलस्तर में उतार चढ़ाव के चलते विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र के 17 गांव बाढ़ की दुश्वारियां झेल रहे हैं। भोजन से दवा तक की परेशानियां झेल रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय में सोमवार को नदी का जलस्तर 93.300 मीटर दर्ज किया गया है। नदी घटता है तो कटान शुरू हो जाती है और बढ़ती है तो घरों में पानी घुस जाता है। भोजन, चिकित्सा व आवास की समस्या तो है ही पशु चारा का संकट सबसे विकट हो गया है। उफनाती सरयू को पार कर चारे की व्यवस्था करने के लिए पशुपालक विवश हैं। कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक, चांदपुर, पड़ाव, नरसिंहपुर, कन्हईपुर, केशवपुर, रानीपुर कठवनिया, लमती, पूरेचेतन, लकड़ी, पकड़ी, फूलडीह, कवलपुर, छतौना आदि गांवों के लोग बाढ़ के संकट का सामना कर रहे हैं। लोगों को बाहर आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। जब से बाढ़ आई तब से अब दो बार चिकित्सकों की टीम ने गांव का दौरा किया है। एक बार सहजौरा पाठक, कल्याणपुर, भरथापुर व पड़ाव के लोगों को बाढ़ राहत किट दी गई है। जुलाई से ही बाढ़ का प्रकोप शुरू हो गया था। अगस्त में तो गांवों में पानी घुसने लगा था। सर्वाधिक संकट उन क्षेत्रों में है जहां तटबंध नहीं है। यदि ऐसे ही स्थिति बरकरार रही तो फोरलेन पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रशासन ने अब तक क्या की मदद
बाढ़ प्रभावित चार गांवों में अब तक एक बार लोगों को राशन किट दिया गया है। दो गांवों के लिए नाव की व्यवस्था की गई है। विधायक अजय सिंह ने दो नाव देने की घोषणा की थी जिसमें से एक गांव वालों को सुपुर्द किया दूसरी नाव का इंतजार है। डीएम डॉ. राजशेखर ने भरथापुर व कल्याणपुर गांव की कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड को निर्देश दिए तो दो ट्रॉली बोल्डर गिराने के बाद बाढ़ खंड के लोगों ने इधर देखना भी मुनासिब नहीं समझा। ग्रामीणों ने ही बोल्डर नदी में डालकर कटान रोकने का प्रयास किया। हालांकि, इसका कोई फायदा नहीं निकला।
खुद के बल पर कर रहे बीमारों की दवा
बाढ़ प्रभावित गांवों में अब तक दो बार चिकित्सा टीम ने दौरा किया है। वर्तमान में जो लोग भी बीमार पड़ रहे हैं उन्हें ग्रामीण खुद नाव से लेकर बाहर आते हैं तथा डॉक्टर के यहां ले जाते हैं। भरथापुर गांव के 80 वर्षीय हरी सिहं सहित कई लोगों की दवा इसलिए नहीं हो पा रही है कि इन लोगों को गांव से निकाल कर डॉक्टर के यहां ले जाना काफी कठिन है।
कैंप लगाकर जल्द वितरित करेंगे दवाएं: अधीक्षक
विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों के संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत प्रभारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद जायसवाल ने बताया कि कल्याणपुर और भरथापुर में दो बार दवा का वितरण हो चुका है। टीकाकरण कैंप का आयोजन जल्दी किया जाएगा। मच्छर निरोधी फॉगिग व छिड़काव भी हो चुका है। अगर अभी भी समस्या है तो जल्द चिकित्सकों की टीम कल्याणपुर, सहजौरा व केशवपुर के लिए भेजी जाएगी।
राहत व बचाव का कार्य चल रहा: एसडीएम
हर्रैया के एसडीएम शिव प्रताप शुक्ल का कहना है कि यह प्रकृतिक आपदा है। नदी के घटने बढ़ने का क्रम चल रहा है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत-बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य टीम न पहुंचने की सूचना ग्रामीणों ने दी है। तत्काल सीएचसी प्रभारी को टीम के साथ रवाना किया जा रहा है। लेखपाल व कानूनगो की एक टीम कल्याणपुर, सहजौरा, केशवपुर, भरथापुर, लोलपुर, विक्रमजोत बांध पर लगातार निगरानी कर रही है। पीड़ितों के हर समस्या का ख्याल रखा जा रहा है।
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सरयू की बाढ़ स्थिर, माझा में कटान तेज
57 सेंटीमीटर लाल निशान से ऊपर है सरयू नदी
कटरिया-चांदपुर तटबंध पर बाढ़ का दबाव
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। सरयू नदी का जलस्तर सोमवार को खतरे के निशान 92.730 मीटर से 57 सेंटीमीटर ऊपर 93.300 मीटर पर रहा। सरयू की स्थिरता से जहां धारा तेज होकर माझा इलाके में कहर बरपा रही है। वहीं, बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग भी विचलित हो चुके हैं।
सोमवार सुबह से ही दिलासपुरा गांव से टकटवा गांव तक खेती योग्य जमीन नदी में काट रही है। पूरे मोतीराम गांव के पास भी हल्की कटान हुई। अतिसंवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर पर लगातार दबाव बना हुआ है। तटबंध की सुरक्षा के लिए बनाए गए सभी बेस व ठोकरों पर पानी टकरा रहा है। जहां पर दिनों रात मरम्मत कार्य भी बाढ़ खंड की ओर से जारी है। तटबंध पर दबाव बढ़ता देख बाढ़ खंड के अफसरों ने भारी मात्रा में बोल्डर मंगाया है। नदी घटते ही तटबंध पर कटान की आशंका बढ़ जाती है। तटबंध पर एसडीओ जितेंद्र कुमार, अवर अभियंता स्वपनिल श्रीवास्तव, संजय यादव, विजय प्रकाश लगातार कैंप कर मरम्मत कार्य करा रहे हैं। गौरा सैफाबाद-तटबंध पर पारा गांव के पास बने ठोकरों और स्परों पर दबाव बरकरार है। किशुनपुर-मोजपुर व टकटवा रिंगबांध पर पानी की लर्हे टकरा रही हैं। पानी से घिरे गांव सुविखा बाबू, खजांचीपुर, टेढवा व अशोकपुर के तीन पुरवे के ग्रामीणों की स्थित जस की तस बनी हुई है। चारों तरफ से पानी से घिरे गांव के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सारा कार्य नाव के सहारे हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को पहुंचाने और पशुओं के चारे की व्यवस्था करने की है। करीब एक माह से पानी से घिरे सुविखा बाबू के लोग अब विचलित होने लगे हैं। बाढ़ को नियति मानने वाले खुद के नसीब को कोस रहे हैं।