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सख्ती में भी चल रहे बगैर मान्यता के स्कूल

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बिना मान्यता वाले स्कूलों की भरमार
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विक्रमजोत ब्लॉक क्षेत्र में फैले हैं ऐसे स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। ब्लॉक क्षेत्र में बगैर मान्यता के संचालित निजी स्कूल संचालकों पर सख्ती का कोई असर नहीं है। करीब दो दर्जन से ज्यादा बिना मान्यता वाले स्कूल बिना किसी खौफ के संचालित हो रहे हैं।
इन स्कूलों के पास न तो योग्य शिक्षक है न ही मानक के भवन। छात्रों को दूसरे संस्थानों में दाखिला कराते हैं। जबकि पढ़ाई खुद के स्कूल में कराते हैं। कई वर्षों से संचालित हो रहे इन स्कूलों में ऊपर घर है तो नीचे के कमरों में स्कूल। बसों और छोटे वाहनों को छात्रों को ढोने के लिए भाड़े पर रख लिए हैं। ऐसा भी नहीं कि छिपे हैं बल्कि बैनर-पोस्टर लगाकर स्कूल का प्रचार-प्रसार भी करते रहते हैं। फिर भी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार इन पर ध्यान नहीं देते। बस्थनवा, खतमसराय, केशवपुर, शंकरपुर, धुसैनिया, हरेवाशुक्ल, पचवस, फूलडीह, मझौवादूवे, तुरसी, छावनी, रामगढ़, केनौना, चपिलाए, तालागांव, मलौलीगोसाई सहित कई ऐसे स्थान हैं। इसमें नर्सरी से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं संचालित की जाती हैं। हालात यह हैं कि हाईवे किनारे शटर लगे दुकान में पब्लिक स्कूल हैं तो खेतों में छप्पर में बेंच लगाकर मॉडर्न स्कूल चला रहे हैं। यहां पढ़ाने वाले शिक्षक आसपास क्षेत्रों के अभिभावकों से सिफारिश कर उनके बच्चों का दाखिला कराते हैं। किताब, कॉपी, ड्रेस सब कुछ बाजार की तय दुकानों पर लेना होता है। चैनल में शामिल कुछ दुकानदार बताते हैं कि हमें लाकर बेचने भर का मुनाफा मिलता है। 60 प्रतिशत कमीशन पर किताबें बेचनी होती हैं। लेनदेन में दिक्कत हुई तो अगले साल दूसरे की दुकानों पर किताबें विद्यालय प्रबंधन रखा देता है। इन स्कूलों के संचालकों का राजनीतिक कनेक्शन होने से अधिकारी भी कार्रवाई से बचते हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि विक्रमजोत ब्लॉक में 120 प्राथमिक विद्यालय, 49 पूर्व माध्यमिक, 19 इंटर कॉलेज ही वैधानिक और पंजीकृत हैं।
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स्कूल प्रबंधन को भेजा है नोटिस : बीईओ
इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) राजेश कुमार का कहना है कि इस समय विभागीय कार्रवाई के चलते चार्ज पर नहीं हूं। लेकिन इससे पहले कई बिना मान्यता वाले स्कूलों को नोटिस भेजा गया है। चुनाव और अस्पष्ट दिशा-निर्देशों के चलते कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो सकी।
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नकल के लिए दबाव बनाते हैं संचालक: प्रधानाचार्य
क्षेत्र के संत तुलसी दास इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हरीराम शुक्ल का कहना है कि बिना मान्यता वाले स्कूलों का बंद होना बहुत जरूरी है। यहां बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है। मार्कशीट अपनी तो टीसी (स्थानांन्तरण प्रमाणपत्र) किसी और विद्यालय की देते हैं। सामूहिक नकल को दबाव अलग से बनाते हैं। बछईपुर पूर्व प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य बालेन्दु भूषण सिंह का कहना है कि इन पब्लिक स्कूलों की वजह से परिषदीय स्कूलों में बच्चे पहुंच ही नहीं पाते। तामझाम दिखाकर किसानों, मजदूरों की पसीने की कमाई लूटते हैं।
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