विक्रमजोत/कुदरहा (बस्ती)। घाघरा का जलस्तर तो स्थिर है लेकिन बांध विहीन क्षेत्रों में खेती योग्य भूमि के कटान में कोई कमी नहीं आ रही है। बृहस्पतिवार को केंद्रीय कार्यालय अयोध्या की रिपोर्ट में 93.120 मिमी बताया गया जो खतरे के निशान 92.730 मिमी से 49 सेमी ऊपर है।
विक्रमजोत-लोलपुर तटबंध से सटे 12 गांव बाढ की चपेट में हैं। बाढ़ का पानी लगातार केशवपुर, रानीपुर, कठवनिया, भदोई, कल्याणपुर, भरथापुर के फसली खेतों में बढता जा रहा है। बांध विहीन गांव सहजौरापठक चारों ओर नदी की मुख्य धारा व सहायक टेढी नदी की पानी से घिर गया है। बाढ विभाग के सहायक अभियंता फूलचंद्र सिंह और दयाशंकर सिंह लगातार कल्याणपुर में कैम्प कर रहे हैं लेकिन बांध पर अति कटान होने के बावजूद भी मजदूर काम नहीं कर रहे हैं। किसी तरह का बचाव राहत कार्य भी होता नहीं दिख रहा है। इससे तटबंधों के किनारे बसे लोगों में भय व्याप्त है। गांव से बिल्कुल सटकर बहती नदी की मुख्य धारा कभी भी कहर ढा सकती है।इन गांवों की सबसे बडी समस्या पशुपालकों को है। चारे के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। दूर दराज से नावों से चारा लाना मजबूरी है। भरथापुर, कल्याणपुर, सहजौरापठक के अधिकांश लोग पशुओं सहित सुरक्षित गांवों में पहुंच गए हैं। पशुओं में बाढ़ के चलते संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना है।प्रशासन की ओर से पशु चिकित्साधिकारी भी गांवों में नहीं पहुंचे हैं।
कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक कलवारी-रामपुर तटबंध की सुरक्षा के लिए बनाए गए स्पर पर रुक रुक कर कटान हो रही है। स्पर संख्या 12 और 14 पूरी तरह कट कर बह गया है जबकि सात और आठ का नोज क्षतिग्रस्त हुआ है। स्पर संख्या पांच के निचले हिस्से में कटन हो रही है। यहां पर स्पर नं. छह नया बनाया गया है। जिस पर पिचिंग का कार्य कराया गया था पत्थर लगातार बैठ रहे हैं। जेई पीके पाण्डेय का कहना है की कटान से हुए नुक़सान की भरपाई के लिए लगातार कार्य कराया जा रहा है।