बस्ती। जिले में धान खरीद के बाद गेहूं क्रय की व्यवस्था बनाई जा रही है, मगर यहां तो भंडार ही खाली नहीं हैं। क्योंकि अपने जिले में मौजूद एफसीआई और सीडब्लूसी के भंडार ठसाठस हैं। ऐसे में गेहूं तो दूर की बात अभी तीन लाख क्विंटल सरकारी चावल भी राइस मिलों में डंप हो गया है। हालांकि, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सहारे इसे अप्रैल तक भंडार में रख लिया जाएगा, मगर जब अप्रैल माह में गेहूं खरीद शुरू होगी तो क्या होगा इसे सोच अभी से जिम्मेदार पसीना-पसीना हो रहे हैं।
जिले में अनाज के एफसीआई व सीडब्लूसी के दो भंडारगृह हैं। इन भंडार गृहों में सरकारी खरीद के चावल व गेहूं के अलावा पीडीएस का अनाज भंडारित किया जाता है। पीडीएस व इस बार धान खरीद के बाद सरकारी चावल के चलते दोनों गोदाम भर गए हैं। इन गोदामों में केवल एक लाख क्विंटल पीडीएस का अनाज की निकासी हर माह होती है। बस यही स्थान इन गोदामों में है। जबकि धान खरीद के बाद अब भी तीन लाख क्विंटल चावल राइस मिलों के पास डंप है। इस चावल को रखने में अभी अप्रैल तक का समय लगेगा। जबकि पहली अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हो जाएगी। यूं तो अभी लक्ष्य निर्धारित नहीं हुआ है, मगर खरीद से जुड़े अधिकारी 80 हजार एमटी लक्ष्य की उम्मीद जता रहे हैं। अब यदि पहले माह में खरीद का ग्राफ बढ़ा तो गेहूं भंडारण में जिम्मेदारों को परेशान होना पड़ेगा। हालांकि, विभाग विकल्प के तौर पर बर्डपुर को विकल्प के तौर पर मान कर चल रही है मगर उस समय क्या हालात होंगे यह कह पाना मुश्किल है। डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि यह सही है कि गोदाम फुल हैं अभी तो चावल रखने की जगह नहीं है। अप्रैल तक चावल ही भंडारित होगा। क्योंकि पीडीएस के उठान से जो जगह निकलेगी उसी में चावल भंडारित हो सकेगा। गेहूं के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं।