संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले के 36 आयुष अस्पताल खुद ही बीमार पड़े हैं। दवा से लेकर डॉक्टर तक का संकट है। धड़ाम हो चुके आयुष अस्पतालों के इस सिस्टम से मरीज जहां लाचार और बेेबस हैं, वहीं बिचौलिए इसी का फायदा उठाकर मरीजों को छूट का लालच देकर उन्हें बाहर की महंगी दवा खरीदवा दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दवा न होने पर यहां बाहर की दवा लिखी जा रही हैं। बताया गया कि सितंबर 2024 के बाद से दवा की आपूर्ति बंद है।
विभागीय जानकारों ने बताया कि आयुष के 36 अस्पतालों में बाहर की दवा लिखी जा रही है। दो साल से इन अस्पतालों के लिए दवा की आपूर्ति नहीं हुई है। आयुष के इन अस्पतालों में 50 बेड का अस्पताल से लेकर क्लीनिक तक शामिल है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जगदीश यादव ने बताया कि दवा की आपूर्ति के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 50 शैय्या बखरियां रुधौली के लिए कुछ दवाएं मिली हैं। जल्द ही यह समस्या दूर हो जाएगी। आयुष विभाग की ओर से जिले में 15 बेड का दो अस्पताल, चार बेड का 28 अस्पताल जबकि पांच क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है।
एक 50 बेड का अस्पताल भी संचालित है। इस अस्पताल में एक ही छत के नीचे आयुर्वेदिक, यूनानी व होम्योपैथिक का इलाज किया जाता है। 50 बेड के अस्पताल को संचालन के समय से ही दवा नहीं मिली थी। पिछले दिनों केवल वहां के लिए मात्र 62 पेटी दवा मिली थी। जिसमें तीन आयुर्वेदिक व चार यूनानी दवाएं थीं। इसका फायदा उठाकर कथित दलाल मरीजों को आयुर्वेदिक और होम्योपैथ व यूनानी की महंगी दवा लिखवा कर मेडिकल स्टोर से खरीदवा दे रहे हैं। बताया गया कि 10 दिन की दवा हजार से दो हजार रुपये तक होती है। मरीजों ने कहा कि यदि अस्पताल में यह दवा मिले तो काफी राहत होगी। मजबूरी में दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है। रुधौली से आए अजय कुमार ने बताया कि आयुष विंग में दवा लेने आए थे। आयुष की दवा से बुखार समेत अन्य दर्द को राहत मिली थी, मगर यहां दवा न होने से बाहर की दवा खरीदनी पड़ी। इसमें चार सौ रुपये खर्च हुए। अस्पताल से सिर्फ पीसीएम की गोली मिली। कोतवाली क्षेत्र से आए अभिषेक ने बताया कि आयुष विंग में काफी दिनों से दवा नहीं आने की बात कहकर एलोपैथ की दवा वह भी पीसीएम की गोली दे रहे हैं। शेष दवा बाहर से लेनी पड़ रही है। एक बार में पांच सौ रुपये लग जा रहे हैं।
आयुष विंग में धड़ल्ले से लिखी जा रही एलोपैथ की बाहरी दवा : जिला अस्पताल के आयुष विंग के जिम्मेदारों ने बताया कि तीन साल हो गए, दवा की आपूर्ति नहीं की गई है। इससे आने वाले मरीजों को एलोपैथ संबंधी दवा देकर काम चलाया जा रहा है। वहीं, इस विंग में भी कथित दलाल सक्रिय हैं। यह मौका भांप कर एलोपैथ दवा की पर्ची थमा दे रहे और बाहर से दवा खरीदवा दे रहे हैं। यहां तीन डॉक्टर तैनात हैं, सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी चलती है, जिसमें ढाई से तीन सौ मरीज की जांच की जाती है।