तीन तटबंधों की सुरक्षा को मिले 35 करोड़
बस्ती।
शासन ने तीन अतिसंवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा और नये स्पर का निर्माण कराने के लिए लगभग 35 करोड़ की मंजूरी दी है। धन जिले को मिल भी गया है। हालांकि, प्रशासन और विभाग की ओर से सात परियोजनाओं के लिए धन की मांग गई थी, फिलहाल, तीन की मंजूरी मिली है। विशेष सचिव जितेंद्र राम त्रिपाठी ने डीएम को यह सूचना दी है।
डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि घाघरा नदी के बाएं तट पर निर्मित अति संवेदनशील तटबंधों पर बाढ़ से कार्य कराने के लिए शासन ने 35 करोड़ की मंजूरी दी है। बताया कि यह पहला अवसर है, जब शासन से बाढ़ से धन जारी किया है। बताया कि बाढ़ खंड प्रथम के एक्सईएन को अभी से अनुबंध का गठन करने का निर्देश दिया गया, ताकि अगले साल बाढ़ आने से पूर्व तटबंधों को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके। जिन तंटबंधों के लिए धन जारी किया गया उनमें सदर तहसील के घाघरा नदी के बाएं तट पर निर्मित कलवारी-रामपुर तटबंध की सुरक्षा के लिए किमी. 14.400 से 15.190 के मध्य 670 मी. लंबाई में रिवेटमेंट, लाचिंग अप्रोच, पिचिगं का कार्य होगा, इसके लिए 10.66 करोड़, इसी तटबंध के किमी. 15.200 से 16.155 के मध्य 875 मी. लंबाई में रिवेटमेंट, लाचिंग, एप्रन पिचिंग के लिए 11.98 करोड़ और तहसील हर्रैया के घाघरा नदी के बाएं तट पर लोलपुर-विक्रमजोत तटबंध के किमी. 2.410 एवं 2.760 पर दो स्पर और किमी. 3.060 पर एक अदद स्पर के पुनर्निर्माण के लिए 12.05 करोड़ सहित कुल 35 करोड़ की मंजूरी दी गई है। यह वहीं तटबंध पर जहां के आसपास के लोग सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित हुए थे और जहां सरकारी स्कूल लगभग डूब ही गया था।
जरूरत से अधिक मिला धन
बस्ती। बाढ़ पीड़ितों को खाद्य राहत सामग्री मुहैया कराने के लिए शासन ने दो करोड़ की मंजूरी दी है, जिसमें अब तक खाद्य सामग्री वितरण के मद में 31 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें 3100 परिवारों के 15,500 सदस्यों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है।
फोटो
छह सौ मीटर में डेंजर जोन बना बांधा
खलवा और खजांची पुरवा वीडी बांध के पास खेती की जमीन धारा में विलीन
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया।
विक्रमजोत, धुसावा बांध के खलवा और खजांची पुरवा के बीच बांध छह सौ मीटर डेंजर जोन बना हुआ है। नदी के कटान से जहां ग्रामीण भयभीत है। वहीं बाढ़ खंड के अधिकारियों को उपाय नहीं सूझ रहे हैं। क्योंकि नदी निचले स्तर से गहराई में कटान कर रही है। इसको रोकना आसान नहीं होता है। अचानक पानी का रुख बंधे की तरफ होता है। देखते ही देखते बांध कटकर नदी की धारा में समा जाता है। वैसे नदी के जलस्तर में कमी आई है। फिर भी वीडी बांध से धारा प्रवाहित होने से कटान नए, नए जगह पर हो रही है। नदी अपने स्थान को घेर रही है। सोमवार को खलवा के पास पीपल का पेड़ धारा में चला गया। मगर अभी वह दिखाई पड़ रहा है। बाढ़ खंड के अधिकारी वहां पर बोल्डर डालने का कार्य कर रहे हैं। जहां पर 15 दिन पहले किसानों की फसल लहलहाती थी। पशु पालक अपने जानवरों के चारागाह के रूप में इस्तेमाल करते थे। वह खेती योग्य की जमीन और चारागाह की जमीन धारा में विलीन हो जाने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर दिखाई देने लगी। अब उन्हें अपने जीविकोपार्जन में परेशानी होगी।