क्षेत्र की दो बस्तियों में चिकन पॉक्स से 22 लोग प्रभावित हैं। यहां पिछले तीन चार दिन में एक के बाद एक बीमार हुए और इनके शरीर पर दाने निकल गए हैं। ग्रामीण इसे माता का प्रकोप मानकर इलाज के साथ झांड़-फूंक में जुटे हैं।
प्रतिनिधि के मुताबिक दलित टोले की10 वर्षीय रोली, आठ वर्षीय संजना, पांच वर्षीय राज, तीन माह की नेहा, 14 वर्षीय राहुल, 13 वर्षीय अंतिमा, छह वर्षीय बृजेश, पांच वर्षीय रानी, 15 वर्षीय लक्ष्मी, चार वर्षीय प्रवेश, छह वर्षीय लक्ष्मी, चार वर्षीय राजू, तीन वर्षीय विभा, तीन वर्षीय शिवा, पांच वर्षीय शिवम, दस वर्षीय विशाल, 16 वर्षीय शुचिता, पांच वर्षीय आनंद, 12वर्षीय नीरज, चार वर्षीय राहुल सहित कुल 22 बच्चे चिकन पॉक्स से प्रभावित हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यहां स्वास्थ्य टीम नहीं आई थी। फिर भी बच्चों को होम्योपैथ की दवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा माता का प्रकोप मानकर झांड़-फूंक भी चल रहा है। संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला मुख्यालय पर कोई सूचना नहीं मिली है। इस नाते मौके पर टीम नहीं गई। अब टीम जा रही है। लोगों को दवाएं आदि वितरित की जाएंगी।
चिकन पॉक्स से गांव में दहशत
चिलवानियां का गांव भरटोलवा का हाल
अमर उजाला ब्यूरो
महसों।
शुभम नगर चंगेरवा ब्लॉक का चिलवनियां ग्राम सभा के भरटोलवा की तस्वीर बेहद खराब है। दो रोज पहले इस गांव में चिकन पॉक्स के 14 मरीज पाए गए थे। दवा आदि तो स्वास्थ्य प्रशासन ने बांट दिया, मगर संक्रामक बीमारी का संकट अभी भी टला नहीं है।
यहां चारों ओर गंदगी का अंबार है तो नालियां जाम हैं, जिसमें मच्छर पनप रहे हैं। हालांकि इस गांव पर सरकार की कृपा बरसी है, जिसके चलते यहां छप्पर के मकान पक्का बन गए, मगर सफाई की स्थिति नहीं बदली। गांव की गलियों में घरों से निकलने वाला पानी जगह-जगह जमा है तो नालियों से सड़ांध उठ रही है। ग्रामीण अभी से इस बात को लेकर भयभीत हैं कि कहीं गांव में संक्रामक रोग न फैल जाए।
ग्राम भरटोलवा की आबादी तकरीबन सौ है। यहां सफाई कर्मी भी तैनात हैं, लेकिन यहां की हालत देखकर तो ऐसा लगता है जैसे वर्षों से सफाई हुई ही नहीं। कूड़े करकट के ढेर हर जगह नजर आ जाएंगे। इसके अलावा नालियों में तो घास उग गई है जिसमें मच्छर पनपते हैं। दो रोज पूर्व गांव में चिकन पॉक्स की सूचना के बाद पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मरीजों की जांच पड़ताल कर उन्हें दवा आदि दे सफाई के लिए जागरूक किया, मगर हालात नहीं बदले।
ग्रामीण बोले
गांव के रामनाथ, धर्मेंद्र, राकेश, भगवती आदि कहते हैं कि सफाई की जिम्मेदारी जिसे दी गई है वह तो कभी-कभार ही इसका निर्वहन करता है, मगर हालात सुधर नहीं रहा है। नालियों की दशा खुद जांच लें। शायद ही कभी इसकी सफाई कराई गई हो।
ग्राम प्रधान ने कहा
ग्राम प्रधान रामजीत सिंह कहते हैं कि सफाई कर्मी नियमित आता है। सफाई भी समय-समय पर कराई जाती है, मगर ग्रामीण बार-बार कहने के बावजूद नालियों में कूड़ा करकट डाल देते हैं, जिससे वह जाम हो जाता है। व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की कोशिश जारी है।