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बिना फिटनेस बच्चों को ढो रहे 209 स्कूल वाहन

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बिना फिटनेस बच्चों को ढो रहे 209 स्कूल वाहन
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बस्ती/गौर। गाजियाबाद में स्कूल बस चालक की लापरवाही से बच्चे की मौत ने सभी को झकझोर दिया है। हालात बताते हैं कि बच्चों की सुरक्षा के लिए न तो स्कूल प्रबंधन और न ही आरटीओ प्रशासन गंभीर है। जिले में करीब 900 पंजीकृत स्कूल वाहन हैं, जिसमें से 209 का फिटनेस ही नहीं है। फिर भी बच्चों को बेहिचक ढोया जा रहा है। यही नहीं, तमाम ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा भी स्कूली बच्चों को ढो रहे हैं जिसे लेकर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, स्कूल वाहनों के लिए जो मानक निर्धारित किए गए हैं, उसमें अधिकांश पालन नहीं हो रहा है।
घटना को लेकर माता-पिता में अपने बच्चों को लेकर चिंता बढ़ गई है तो वहीं विद्यालय प्रबंधन को सुझाव भी दे रहे हैं। शुक्रवार को गौर क्षेत्र में स्कूली बसों की पड़ताल की तो देखा गया कि कुछ बसों में सीट से अधिक बच्चे बसों में बैठाए गए थे। जबकि कुछ स्कूली बसों में नियमों का पालन देखने को मिला। इसको लेकर जब बसों में बैठे बच्चों से सवाल किया गया तो बच्चों ने बताया कि सीट से अधिक बच्चों के बैठने पर दिक्कत होती है। इस समय भीषण गर्मी चल रही है जिससे उन्हें काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों को होती है। इस बात की शिकायत कभी-कभी हम लोग अपने घरों पर करते हैं और अभिभावक स्कूल प्रबंधन से व्यवस्था में सुधार के लिए कहते हैं। लेकिन, कोई सुधार नहीं होता। अभिभावकों ने गाजियाबाद की घटना को लेकर विद्यालय प्रबंधन को सुझाव देते हुए बताया कि बसों में सीट के मुताबिक ही बच्चों को बैठाएं।
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उदय पब्लिक स्कूल डुहवा के प्रबंधक जय सिंह व जेके इंटर कॉलेज हलुआ बाजार के प्रधानाचार्य संजय वर्मा ने बताया कि स्कूली बसों में बच्चों को सीट के मुताबिक ही बैठाया जाता है। ड्राइवर को सख्त निर्देश दिया गया है कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात न करें। चालक को सीट बेल्ट पहनने के लिए निर्देशित किया जाता है। बच्चों को हमेशा सावधानीपूर्वक बसों में चढ़ाया और उतारा जाता है। चालक और परिचालक को यह भी निर्देश दिया गया है कि बस के पीछे यदि कोई वाहन आ रहा है तो जगह रहते हुए बस को सड़क के किनारे खड़ा करें।
इन लोगों ने यह भी बताया कि परिवहन विभाग की ओर से जारी फिटनेस के बाद ही बसों का संचालन कराया जाता है। इसके साथ ही सभी गाड़ियों में स्पीड गवर्नर भी लगाया गया है। बसों के पीछे इमरजेंसी मोबाइल नंबर भी लिखा गया है। समय-समय पर अभिभावकों के साथ मीटिंग करके सुझाव भी लिए जाते हैं। बच्चों और अभिभावकों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।
बिना सीट बेल्ट बांधे स्कूल बस चलाते मिला चालक
कप्तानगंज। क्षेत्र में बच्चों को ले जाने ले आने के लिए चलते स्कूल वाहन स्थिति किसी से छुपी नहीं है। इक्का-दुक्का स्कूलों को छोड़कर शायद ही कोई ऐसा स्कूल बस होगा जिसकी फिटनेस अच्छी हो। कप्तानगंज क्षेत्र में बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने के लिए बस और मैजिक का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकांश चालक गाड़ी चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करते। पड़ताल के दौरान एक स्कूल की बस रुकी जो कि बच्चों को स्कूल से घर ले जा रही थी। चालक पवन कुमार ने बताया कि बस में कागज नहीं है। घर पर रखा है। बस में सवार छात्र आदित्य ने बताया कि ड्राइवर अंकल अच्छे हैं। बस तेज नहीं चलाते हैं। इसी बस में सवार आनंद कुमार ने बताया कि बस नई है। ड्राइवर अंकल अच्छी तरीके से गाड़ी चलाते हैं।
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यह है स्कूल वाहन के सामान्य मानक
- स्कूल वाहन की खिड़कियों पर ग्रिल और जाली लगी हो।
- वाहन में अग्निशमन यंत्र लगा हो जिससे आग लगने की स्थिति में तुरंत बचाव किया जा सके।
- स्कूल बस के पीछे स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
- दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
- चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव व ड्राइवर के पास लाइसेंस और ट्रांसपोर्ट परमिट अवश्य होना चाहिए।
- स्कूल वाहन पीले रंग से पेंट होना चाहिए।
- बस में आपातकालीन निकासी द्वार होना चाहिए।
- बस या स्कूल वाहन में फर्स्टएड बॉक्स होना चाहिए।
- बस में प्रेशर हार्न या मल्टीटोन हार्न नहीं होना चाहिए।
- सभी सीटों पर सीट बेल्ट होना चाहिए।
- लोकेशन ट्रेसिंग डिवाइस और सीसीटीवी कैमरा लगा होना चाहिए।
स्कूल वाहन श्रेणी में करीब नौ सौ बसें पंजीकृत हैं। इसमें से करीब 691 वाहन फिट हैं, जिसमें स्कूल बस और अन्य वाहन शामिल हैं। जिन 209 स्कूलों वाहनों का फिटनेस नहीं है। उन्हें पूर्व में ही नोटिस भेजा गया है। इसके बाद भी बसों का फिटनेस न कराने वाले स्कूलों के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ मानक विहीन वाहनों से बच्चों को स्कूल ले जाने वाहनों की भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
रविकांश शुक्ला, आरटीओ प्रवर्तन
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